नारायणा धाम में पुष्प वर्षा, स्वर्णगिरी के पलाश ने घोला रंग

251 क्विंटल फूलों से महकी कृष्ण-सुदामा की नगरी, हाथी, घोड़े और तोपों के साथ निकली फाग यात्रा
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उज्जैन। भगवान श्री कृष्ण और सुदामा की पावन मैत्री स्थली नारायणा धाम सोमवार को भक्ति और रंगों के अनूठे उत्सव का साक्षी बना। स्वर्णगिरी पर्वत से लाए गए टेसू (पलाश) के फूलों और श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित 251 क्विंटल पुष्पों से यहाँ होली खेली गई। इस अलौकिक आयोजन में देश के कोने-कोने से आए हजारों श्रद्धालु पहुंचे। परंपरा के अनुसार, स्वर्णगिरी पर्वत के पीठाधीश्वर श्री महेंद्रगिरी महाराज स्वयं अपने कंधों पर पलाश के फूलों की टोकरी लेकर पैदल यात्रा करते हुए नारायणा धाम पहुंचे। इससे पूर्व, ग्राम चिरमिया स्थित मुखारविंद पर मुख्य पुजारी पं. प्रेमनारायण शर्मा द्वारा भगवान स्वर्णगिरीराज का विशेष अभिषेक किया गया। सोमवार सुबह 9 बजे जब महाराज गाजे-बाजे के साथ मंदिर पहुंचे, तो नारायणा धाम के पुजारियों ने तिलक लगाकर उनकी अगवानी की। भगवान कृष्ण-सुदामा के चरणों में पलाश अर्पित करने के साथ ही होली का विधिवत शुभारंभ हुआ।
राजसी ठाठ-बाट के साथ निकली फाग यात्रा
सुबह 9.30 बजे मंदिर परिसर से भव्य चल समारोह प्रारंभ हुआ, जिसने समूचे क्षेत्र को उत्सव के रंग में सराबोर कर दिया। यात्रा में ऊंट, घोड़े, हाथी, ढोल-नगाड़े, बैंड-बाजे और नृत्य करती मंडलियां शामिल थीं। अखाड़ों के प्रदर्शन और तोपों से की जा रही पुष्प व गुलाल की वर्षा विशेष आकर्षण रही। ग्रामवासियों ने जगह-जगह मंच लगाकर यात्रा का स्वागत किया और श्रद्धालुओं के लिए पोहे-जलेबी व शीतल पेय की व्यवस्था की।
शिखर पर फहराई ध्वजा हुआ विशाल भंडारा
दोपहर 2 बजे मंत्रोच्चार के बीच मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण संपन्न हुआ। ध्वज पूजन के लाभार्थी मंगलनाथ मंदिर के पुजारी महंत जितेंद्र भारती एवं जया भारती का विशेष सम्मान किया गया। समापन पर भगवान को चने और चावल का भोग लगाया गया, जिसके पश्चात विशाल भंडारे में हजारों भक्तों ने महाप्रसादी ग्रहण की।
इनका कहना
यह वही स्वर्णगिरी पर्वत है जहाँ से प्रभु श्रीकृष्ण और सुदामा लकडिय़ां बीनकर लाए थे। यहाँ की होली केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि श्रद्धा और प्राचीन स्मृतियों का मिलन है।
— महंत श्री महेंद्रगिरी महाराज, पीठाधीश्वर स्वर्णगिरी पर्वत










