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न मुद्दे न लहर, प्रतिशत के मायने तलाश रही राजनीति

भाजपा-कांग्रेस नेता विश्लेषण अपने-अपने अनुसार कर रहे

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अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन:एंटी इंकम्बेंसी,अपनों की बगावत,कड़े मुकाबले,आरोप-प्रत्यारोप के साथ प्रचार की गहमा-गहमी के बीच जिले के सात विधानसभा क्षेत्रों के ५२ प्रत्याशियों की राजनीतिक किस्मत तीन दिसंबर तक ईवीएम में बंद हो गई है। चुनाव प्रचार में सितारों की चमक और वादे और घोषणाओं की घनघोर बारिश के बाद भी इस बार न लहर नजर आई न ही मुद्दे प्रभावी रहे।

उज्जैन जिले की ७ विधानसभा सीटों पर हुए मतदान का परिणाम जो भी रहे,लेकिन मतदाताओं के दृढ़ संकल्प ने मतप्रतिशत बढ़ाकर इस चुनाव को विशेष बना दिया। भाजपा-कांग्रेस के नेता इस बढ़े मत प्रतिशत का विश्लेषण भले ही अपने-अपने अनुसार कर रहे हों लेकिन इतना तय है कि क्षेत्र ने जागरुकता के पथ पर एक और मजबूत कदम बढ़ा दिया है।

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चर्चित सीटों पर सभी की निगाहें…

क्षेत्र में अच्छा मुकाबला होने बात तो चुनाव की बिसात बिछने के साथ ही कही जाने लगी थी,लेकिन मतदान के दिन भी जिले की चर्चित सीटों की चर्चा होती रही। सभी की निगाहें उज्जैन दक्षिण,महिदपुर और बडऩगर पर है। उज्जैन दक्षिण से उच्चशिक्षा मंत्री मोहन यादव उम्मीदवार है। वहीं महिदपुर और बडऩगर में बगावत के कारण त्रिकोणिय मुकाबला होने से सभी की नजर वोङ्क्षटग ट्रैंड पर भी लगी रही। इन सीट की रिपोर्ट के आधार पर बढ़त और नुकसान का आंकलन किया जा रहा है।

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