बच्चा पढ़ाई से बचता है? तो फोकस बढ़ाने के लिए ये आसान उपाय

पेरेंट्स की यही शिकायत होती है कि उनका बच्चा पढ़ाई में मन नहीं लगाता. जैसे ही किताब खोलने का समय आता है, बच्चा बहाने बनाने लगता है, बोर हो जाता है या फिर उसका ध्यान इधर-उधर भटकने लगता है. बच्चों को डांटने की नहीं, बल्कि समझने की जरूरत होती है. अगर पढ़ाई को थोड़ा आसान, मजेदार और सही तरीके से कराया जाए, तो बच्चा खुद ही उसमें रुचि लेने लगता है. तो आइए जानते हैं ऐसे आसान और असरदार उपाय,
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
बच्चों के लिए रूटीन बहुत जरूरी होता है. रोज अलग-अलग समय पर पढ़ाने से बच्चा कन्फ्यूज हो जाता है. इसलिए कोशिश करें कि पढ़ाई का एक तय समय हो और रोज उसी समय बच्चा पढ़ने बैठे. साथ ही, पढ़ने की जगह शांत और साफ होनी चाहिए. टीवी, तेज आवाज या लोगों की आवाजाही से दूर एक कोना तय करें, ताकि बच्चे का ध्यान आसानी से पढ़ाई पर टिक सके.
लगातार पढ़ने से बच्चे जल्दी थक जाते हैं. उनका दिमाग भारी हो जाता है और वे कुछ भी याद नहीं कर पाते. बेहतर होगा कि पढ़ाई को 30–40 मिनट के हिस्सों में बांटा जाए. हर सेशन के बाद 5–10 मिनट का छोटा ब्रेक दें. इस दौरान बच्चा थोड़ा टहल सकता है, पानी पी सकता है या हल्की स्ट्रेचिंग कर सकता है. इससे दिमाग फिर से ताजा हो जाता है.
जोर-जोर से पढ़ना या रटना ज्यादातर बच्चों के लिए उबाऊ होता है. अगर बच्चे को लिखकर याद कराया जाए, तो उसे चीजें जल्दी समझ में आती हैं और लंबे समय तक याद रहती हैं. आप कठिन टॉपिक को आसान भाषा में समझाएं, उदाहरण दें और जरूरत हो तो चित्र, चार्ट या रंगीन पेन का इस्तेमाल करें. इससे पढ़ाई खेल जैसी लगने लगती है.
पढ़ाई के समय मोबाइल, टेबलेट या टीवी बच्चे का सबसे बड़ा दुश्मन होता है. नोटिफिकेशन की आवाज या स्क्रीन की चमक बच्चे का पूरा ध्यान भटका देती है. इसलिए पढ़ाई के दौरान इन सभी चीजों को बच्चे से दूर रखें. उसे प्यार से समझाएं कि पढ़ाई पूरी होने के बाद ही मोबाइल देखने या गेम खेलने का समय मिलेगा. इससे बच्चा खुद भी पढ़ाई जल्दी खत्म करने की कोशिश करेगा.
जब बच्चा थोड़ा भी अच्छा करे, तो उसकी तारीफ जरूर करें.बहुत अच्छा किया, आज तुमने ध्यान से पढ़ाई की जैसे छोटे शब्द बच्चे का हौसला बढ़ा देते हैं. बार-बार गलती पर टोकने के बजाय सही काम पर ध्यान दें. इससे बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ता है और वह पढ़ाई से डरने के बजाय उसे अपनाने लगता है.
पढ़ाई को सजा की तरह पेश न करें. इसे रोजमर्रा की जिंदगी का एक सामान्य हिस्सा बनाएं, जैसे खेलना या खाना.बच्चे से उसकी पसंद पूछें, उसे कौन सा विषय अच्छा लगता है, किस तरीके से पढ़ना उसे आसान लगता है.जब बच्चा खुद को समझा हुआ महसूस करता है, तो वह पढ़ाई में ज्यादा मन लगाता है.









