बाबा महाकाल को भस्म अर्पित करने वाले भगवान पुरी महाराज ब्रह्मलीन

मनावर के आश्रम में आज दी जाएगी समाधि
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उज्जैन। ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में महंत प्रतिनिधि के रूप में भगवान महाकाल को भस्म अर्पित करने वाले महानिर्वाणी अखाड़े के वरिष्ठ साधु भगवानपुरी महाराज रविवार को ब्रह्मलीन हो गए हैं। वे पिछले दो महीने से अस्वस्थथे। दिसंबर महीने से उनका इंदौर के निजी अस्पताल में इलाज में किया जा रहा था, जिसके पश्चात वे धार जिले के मनावर स्थित अपने आश्रम में विश्राम कर रहे थे। महाराजश्री के देवलोकगमन की सूचना मिलते ही महाकाल मंदिर और अखाड़े से जुड़े भक्तों में शोक की लहर दौड़ गई। अब उनकी जगह पर पिछले दो महीने से महानिर्वाणी अखाड़े के शिवांग गिरि महाराज भस्म अर्पित करने का जिम्मा उठा रहे हैं।
ब्रह्मलीन भगवानपुरी महाराज पिछले 25 साल से अधिक समय से भगवान महाकाल की भस्म तैयार करने से लेकर सुबह भस्मार्ती में अर्पित करने की जिम्मेदारी निभा रहे थे। महाराज श्री का समाधिकरण सोमवार को दोपहर में धार जिले के मनावर में स्थित उनके निजी आश्रम में होगा।
महानिर्वाणी अखाड़ा अर्पित करता है भस्म
प्रतिदिन तड़के 4 बजे होने वाली भस्मार्ती की एक विशेष परंपरा है। अखाड़े की परंपरा अनुसार भगवान महाकाल को भस्म महानिर्वाणी अखाड़े के महंत अथवा उनके प्रतिनिधि द्वारा ही अर्पित की जाती है। मंदिर परिसर स्थित महानिर्वाणी अखाड़े के आश्रम में महंत और अन्य साधु-संत निवास करते हैं। वर्तमान में महंत विनीतगिरि महाराज गादीपति महंत के रूप में भस्म अर्पण की व्यवस्था संभाल रहे हैं। आमतौर पर गादीपति महंत स्वयं ही भगवान को भस्म अर्पित करते हैं लेकिन उनके प्रवास या बाहर होने की स्थिति में प्रतिनिधि के रूप में भगवानपुरी महाराज यह जिम्मेदारी निभाते थे। लंबे समय तक उन्होंने प्रतिनिधि के रूप में भगवान महाकाल की सेवा की।










