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महाशिवरात्रि महापर्व:दावे पर खरा उतरा प्रशासन 40 मिनट में भक्तों को दर्शन

महाशिवरात्रि : महाकाल मंदिर में दोपहर दो बजे तक 2.50 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

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44 घंटों तक होंगे महाकाल के दर्शन

सामान्य दर्शन के लिए 1.5 किमी पैदल चलना पड़ रहा

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ज्योतिर्लिंग समेत शिवालयों में दर्शन-पूजन का दौर जारी…

आज महाशिवरात्रि पर्व की धूम है। 12 ज्योतिर्लिंग और शिव मंदिरों में दर्शन-पूजन का सिलसिला चल रहा है। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में दोपहर 2 बजे तक 2.50 लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। ओंकारेश्वर और काशी विश्वनाथ में भी भक्तों की भारी भीड़ है।

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अक्षरविश्व न्यूज:उज्जैन। 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री महाकालेश्वर मंदिर महाशिवरात्रि महापर्व पर रविवार को भक्ति की खुशबू से महक उठा। १.५ किमी पैदल चलकर जब श्रद्धालु बाबा महाकाल के समक्ष पहुंचे तो किसी की आंखों से आंसू आ गए तो किसी के चेहरे पर संतोष के भाव थे। इस दौरान पूरा परिसर जय श्री महाकाल और हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा।

बाबा महाकाल के ४० मिनट में दर्शन करने के अपने दावे पर प्रशासन खरा उतरा। हालांकि, जितनी उम्मीद श्रद्धालुओं के आने की प्रशासन ने लगाई थी, उतनी संख्या में श्रद्धालु नहीं पहुंचे। श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य होने से निर्धारित समय के अंदर ही श्रद्धालु दर्शन कर बाहर निकले। दोपहर २ बजे तक २.५० लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके थे। शाम तक यह आंकड़ा ५ लाख से अधिक पहुंचने की उम्मीद है।

दरअसल, महाशिवरात्रि पर मध्य रात्रि 2.30 बजे मंदिर के पट खोले गए। प्रथम घंटाल बजाकर मंदिर में प्रवेश किया गया। मंत्रोच्चार के साथ गर्भगृह में स्थापित सभी प्रतिमाओं का पूजन कर हरिओम का जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद पंडे-पुजारियों ने जलाभिषेक किया। फिर दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से पूजन किया गया।

इसके बाद भगवान महाकाल को भस्म रमाई गई। शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल और रुद्राक्ष की माला के साथ-साथ मोगरे और गुलाब से बनी फूलों की माला अर्पित की गई। तडक़े हुई भस्मार्ती में प्रवेश पासधारी श्रद्धालुओं के साथ-साथ चलित भस्मार्ती के दर्शन भी करवाए गए। इसके पश्चात महाकाल को भांग, चंदन और त्रिपुंड अर्पित कर राजा स्वरूप शृंगार कर फूलों की वर्षा की गई।

44 घंटे खुले रहेंगे पट

महाशिवरात्रि पर्व पर तडक़े २.३० बजे मंदिर के पट खुले। दिनभर जलधारा से भगवान महाकाल का अभिषेक किया जा रहा है एवं रात में बाबा महाकाल का विशेष पूजन एवं अभिषेक किया जाएगा। अगले दिन १६ फरवरी को सुबह भगवान के सप्तधान्य शृंगार एवं सेहरे के दर्शन होंगे और दोपहर १२ बजे भस्मार्ती होगी। इस तरह मंदिर के पट करीब ४४ घंटे तक खुले रहेंगे।

कल दोपहर में भस्मार्ती

16 फरवरी को महाशिवरात्रि उत्सव का समापन होगा। साल में यह एकमात्र मौका होता है जब दोपहर में भस्मार्ती होती है। इस दिन ३ क्विंटल फूलों से बना बाबा महाकाल का सेहरा भक्तों के बीच लुटाया जाता है। मान्यता है कि बाबा के सेहरे के धान, फूल आदि रखने से घर हमेशा धन-धान्य से भरा रहता है।

सीएम का परिवार भी पहुंचा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की धर्मपत्नी सीमा यादव ने सपरिवार भगवान महाकाल के दर्शन किए। मंदिर प्रबंध समिति की ओर से उप प्रशासक सिम्मी यादव ने श्रीमती सीमा यादव का स्वागत एवं सत्कार किया।

8 लेयर का जिगजेग बनाया

कर्कराज पार्किंग में वाहन पार्क कर श्रद्धालु चारधाम पहुंच रहे हैं। इसके लिए उन्हें १.५ से २ किमी पैदल चलना पड़ रहा है। चारधाम पर आठ लेयर का जिगजेग बनाया गया है जहां से सामान्य दर्शनार्थी शक्तिपथ, त्रिवेणी संग्रहालय के समीप से नंदी द्वार से श्री महाकाल महालोक, मानसरोवर भवन, फैसेलिटी सेंटर 1, टनल, नवीन टनल 1 से होकर गणेश मंडपम् से भगवान महाकाल के दर्शन कर रहे हैं। दर्शन के बाद आपातकालीन निर्गम द्वार से बाहर आकर गणेश मंदिर, हरसिद्धि मंदिर चौराहा होते हुए रवाना हो रहे हैं।

शीघ्र दर्शन व पासधारी श्रद्धालुओं की एंट्री

शीघ्र दर्शन टिकट वाले श्रद्धालुओं के लिए भील समाज धर्मशाला के पास से अलग से बैरिकेडिंग की गई है। यहां से एंट्री कर चारधाम मंदिर पार्किंग, अशोक सेतु, मानसरोवर भवन, फैसेलिटी सेंटर 1, टनल, नवीन टनल 1 से होकर गणेश मंडपम् से बाबा महाकाल के दर्शन कर रहे हैं। इसके बाद आपातकालीन निर्गम द्वार से बाहर निकलकर बड़ा गणेश मंदिर, हरसिद्धि मंदिर चौराहा होते हुए रवाना हो रहे हैं। पासधारी श्रद्धालु हरसिद्धि पाल पार्किंग जिगजेग में होते हुए बड़ा गणेश के समीप वाली गली, प्रीपेड बूथ तिराहा, शहनाई जिगजेग द्वार नंबर 1 से मंदिर में प्रवेश कर फैसेलिटी सेंटर 1, टनल, नवीन टनल 1 से होकर गणेश मंडपम् से दर्शन कर रहे हैं। दर्शन के बाद इमरजेंसी एग्जिट द्वार से बाहर आकर बड़ा गणेश मंदिर, हरसिद्धि मंदिर चौराहा होते हुए रवाना हो रहे हैं।

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