ये है नसीब… पहले मौत का खौफ फिर हेलिकॉप्टर में बैठने का पूरा हुआ शौक

बडऩगर में एक परिवार के तीन सदस्यों ने 40 घंटे में देखे कुदरत के करिश्मे
सेमलिया में बाढ़ के टापू से खजराना पहुंच गए…
वे खतरे और रोमांच के पल आसिफ की जबानी
सुधीर नागर. उज्जैन:कुदरत का खेल भी निराला है… वह कब किसको क्या दे दे, कोई नहीं जानता। उज्जैन जिले के बडऩगर तहसील के गांव सेमलिया में रहने वाले लियाकत पटेल के पुत्र आसिफ और उसकी गर्भवती पत्नी फरजाना ने 40 घंटे के अंतराल में कुदरत के कई करिश्मे देखे। मौत का खौफ सामने दिखाई दे रहा था, लेकिन कुछ घंटों में न केवल जिंदगी उनके सामने मुस्कुरा दी बल्कि हेलिकॉप्टर में बैठने का सपना भी पूरा हो गया, वह भी वायुसेना के।
वायुसेना के हेलिकॉप्टर ने रविवार को आसिफ, फरजाना बी और उनके रिश्तेदार नसीब नामक युवक को बाढ़ के पानी से टापू बने सेमलिया गांव से सुरक्षित इंदौर भेजा। तीनों को पहले एमवाय हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां चेकअप और जरूरी मेडिसिन देने के बाद एंबुलेंस से रिश्तेदार के घर खजराना पहुंचा दिया। आसिफ पिता लियाकत पटेल ने बताया शनिवार रात से रविवार दोपहर तक मौत का खौफ दिख रहा था।
चारों तरफ पानी इतना था कि बार बार बुरे ख्याल जेहन में आ रहे थे। पत्नी फरजाना गर्भवती है और नौवां महीना लगने वाला है, ऐसे में आने वाली खुशियों के बीच चारों तरफ खतरों का मंजर दिखाई दे रहा था, लेकिन सेना के हेलिकॉप्टर ने हमारा सारा टेंशन ही दूर कर दिया। हमने कभी सोचा भी नहीं था कि हेलिकॉप्टर में इस तरह बैठेंगे। बचपन से यह सपना तो देखता रहता था कि कभी हवाई यात्रा करूंगा, लेकिन मौत के खौफ के बीच हेलिकॉप्टर में बैठने का अरमान भी पूरा हो गया। यह कुदरत का ही करिश्मा है।
पहले सैनिक उतरा, फिर फरजाना को सबसे पहले ऊपर खींचा…
घर की छत से हेलिकॉप्टर तक पहुंचने का रोमांच भी आसिफ और फरजाना कभी भुला नहीं पाएंगे। पहले हेलिकॉप्टर से एक सैनिक उतरा, उसने सबसे पहले फरजाना को जैकेट पहनाई फिर तार नुमा रस्सी झूले में बैठाकर लॉक कर ऊपर हेलिकॉप्टर में खिंचवाया। बाद में क्रमश: आसिफ और नसीब को हेलिकॉप्टर तक पहुंचाया। घर की छत से झूलते हुए हेलिकॉप्टर में बैठने तक का रोमांच भी अलग था। सेना के साथ होने से खौफ भी दूर हो गया था। उन्होंने सेना को धन्यवाद दिया और सरकार को भी क्योंकि सीएम शिवराजसिंह चौहान के प्रयासों से उन पर आया खतरा टल गया।
नसीब से ‘नसीब’ आ गया लेकिन वापस नहीं जा सका…
आसिफ ने अक्षरविश्व से अपने उन पलों को साझा किया, जब वे खतरे से घिर गए थे। आसिफ ने बताया शनिवार की रात ही पानी तेज हो गया था। देर रात घर में घुस गया।
इससे पूरी रात घर की सीढ़ी पर बैठकर गुजारना पड़ी। सुबह जब पानी कम था तो पिता लियाकत पटेल रस्सी के सहारे गांव से बाहर सुरक्षित निकल गए, लेकिन बाद में पानी बढ़ गया तो वे फंस गए। पानी बढऩे लगा तो छत पर चले गए थे। इसी बीच बड़ावदी निवासी युवक नसीब ट्यूब के सहारे उन तक आ गया, लेकिन बहाव बढ़ जाने से वह भी फंस गया।









