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वकालत के लिए अभा बार परीक्षा उत्तीर्ण अनिवार्य

एमपी स्टेट बार कौंसिल प्रशासनिक समिति निर्देश

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अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन एमपी स्टेट बार कौंसिल की प्रशासनिक समिति ने साफ किया गया कि बार कौंसिल आफ इंडिया द्वारा आयोजित अखिल भारतीय बार परीक्षा उत्तीर्ण नहीं करने वाले अधिवक्ता वकालत नहीं कर सकेंगे।

दरअसल, नए अधिवक्ताओं के नामांकन उपरांत जो प्राविधिक प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाते हैं, उनकी वैधता महज दो वर्ष की होती है। इन दो वर्षों के भीतर अखिल भारतीय बार परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होता है। ऐसा न किए जाने की सूरत में संबंधित अधिवक्ता वकालत के योग्य नहीं रह जाता। वह परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद ही अधिवक्ता अधिनियम की धारा-49 के अंतर्गत वकालत का पात्र हो सकता है।

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बैठक में दी जानकारी

एमपी स्टेट बार कौंसिल की प्रशासनिक समिति की बैठक पिछले दिनों जबलपुर में हुई थी। इसमें स्पष्ट किया गया कि दो वर्ष के भीतर अभा बार परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले अधिवक्ता को प्राविधिक प्रमाण पत्र स्टेट बार आफिस में जमा करना होगा। इसके बाद ही बार कौंसिल आफ इंडिया द्वारा प्रदत्त किए जाने वाले प्लेस आफ प्रेक्टिस के आधार पर अधिवक्ता नामांकन की मूल सनद व परिचय पत्र जारी किया जाएगा। ऐसे अधिवक्ताओं जिन्होंने अभा बार परीक्षा दो वर्ष के भीतर उत्तीर्ण नहीं की फिर भी वकालत में जुटे हैं, उनकी शिकायत मिलने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस सिलसिले में राज्य के सभी न्यायालयों व अधिवक्ता संघों को पत्र भेज दिए गए हैं।

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तो नहीं मिलेगा योजनाओं का लाभ

कई अभिभाषकों की वकालात पर खतरा मंडरा रहा है। अभिभाषकों को सनद का सत्यापन फार्म या घोषणा फार्म 30 सितंबर 2023 से पहले जमा कराना है। सैंकड़ों वकील हैं जिन्होंने अब तक सनद का सत्यापन या घोषणा फार्म जमा ही नहीं किया है। आनलाइन जमा किए जाने वाले इन फार्म को लेकर राज्य अधिवक्ता परिषद कई बार अपील जारी कर चुका है। सनद सत्यापन या घोषणा फार्म भरने वाले वकीलों को ही मध्य प्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद और राज्य शासन द्वारा जारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा।

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