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शिप्रा पर बनेगा रिवर फ्रंट, 10 लाख पौधे लगेंगे

शहरी वनीकरण परियोजना के तहत नगर निगम सीमा में लगाए जाएंगे पौधे

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। शिप्रा नदी पर बनाए जा रहे 29 किमी लंबे घाटों के दोनों तरफ सघन पौधारोपण होगा। शहरी वनीकरण परियोजना के तहत शहर के अलग-अलग इलाकों में 10 लाख पौधे लगाए जाएंगे। यह पौधे छायादार और फलदार होंगे। इन पौधों के पेड़ बनने से शिप्रा किनारे घना वन विकसित होगा।

यह फैसला शनिवार को नगरीय विकास के आयुक्त संकेत भोंडवे की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया। बैठक में मेला अधिकारी आशीष सिंह, कलेक्टर रौशनकुमार सिंह, निगमायुक्त अभिलाष मिश्रा भी उपस्थित थे। सिंह ने बताया कि सिंहस्थ और अन्य मुख्य पर्वों पर उज्जैन शहर में आने वाले श्रद्धालुओं के सुव्यवस्थित मूवमेंट के लिए जिले के पहुंच मार्गों पर आवश्यक कार्य किए जा रहे हंै। इन मार्गों पर ईवी चार्जिंग स्टेशन भी विकसित किए जा रहे हैं।

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पौधारोपण के लिए यह तैयारी
कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने पौधारोपण की कार्ययोजना की जानकारी दी। इसके अनुसार भूमि की पहचान कर ली गई है। यहां पर पौधारोपण की तैयारी की जा रही है। एनजीओ के माध्यम से पौधे लगाए जाएंगे।

कहां-कहां लगेंगे पौधे
विक्रम विवि, एमआर-5, मेघदूत पार्किंग के पीछे, चकौर पार्क, शक्ति पथ रोड, पीलिया खाल नाले के दोनों तरफ, शहर के 400 से अधिक उद्यानों में, शहर के विभिन्न मार्गों के सड़क किनारे एवं मीडियन पर, संस्थानिक भूमि और अन्य सरकारी कार्यालयों के परिसर में पौधे लगाए जाएंगे।

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ग्रीन सिंहस्थ का संकल्प
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुसार पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए ग्रीन सिंहस्थ की कल्पना की गई है। बैठक में सीएम की ग्रीन सिंहस्थ योजना को मूर्त रूप देने के लिए चर्चा की गई। नगर निगम, स्मार्ट सिटी, वन विभाग, उद्यानिकी विभाग और अन्य संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए।

मदर नर्सरी विकसित होगी
पौधारोपण के लिए मदर नर्सरी विकसित की जाएगी। सिंहस्थ के तहत निर्माणाधीन मार्गों, जिले के अन्य मार्गों के किनारे, डिवाइडरों में गुलमोहर, पलाश, टिकोमा, अमलतास, कचनार, आम, अमरूद, बेलपत्र, नीम, पीपल, इमली, शीशम, जामुन के पौधों को रोपण किया जाएगा। पौधारोपण को सफल बनाने के लिए निर्धारित मापदंड अनुसार गड्ढे तैयार किए जाएंगे। क्लोजर एरिया विकसित किया जाएगा। जियो टेगिंग भी की जाएगी।

पौधे गोद भी दिए जाएंगे
पौधों का जीवन सुरक्षित करने के लिए जनभागीदारी भी की जाएगी। पौधों को गोद दिया जाएगा। इन पौधों को सामाजिक संस्था या व्यक्ति गोद ले सकेंगे। अफसरों ने वन विभाग, नगर निगम, जिला पंचायत, स्मार्ट सिटी, उद्यानिकी विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों और सामाजिक संस्थाओं को जनभागीदारी बढ़ाने के लिए टीम गठित करने के निर्देश दिए।

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