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सिंहस्थ : उज्जैन में साधु-संतों के बीच अखाड़ों के वर्चस्व की जंग

रवींद्र पुरी महाराज (महानिर्वाणी) को 8 अखाड़ों का मिला समर्थन

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अक्षरविश्व न्यूज  उज्जैन। 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ से पहले साधु-संतों का प्रतिनिधित्व करने वाली अखाड़ा परिषद् में वर्चस्व की जंग शुरू हो गई है। साधु समाज के सर्वोच्च संगठन अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद पर महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव रवींद्र पुरी ने बहुमत होने की बात की है। उनके मुताबिक उनकी परिषद् को 8 अखाड़ों का समर्थन हासिल है। रविवार को मंगलनाथ मार्ग स्थित वैष्णव साधुओं के निर्वाणी अणि अखाड़े में संतों के समागम में आठ अखाड़ों के स्थानीय प्रमुखों ने रवींद्र पुरी का सम्मान किया।

क्या हैं अखाड़े : आदि शंकराचार्य ने सनातन की रक्षा के लिए अखाड़ों की स्थापना की थी। इसमें रहने वाला साधु समाज सनातन धर्म को बचाने के लिए जान तक देने को तैयार रहता था। शिवजी को आराध्य मानने वाले शैव और विष्णुजी को मानने वाले वैष्णव अखाड़े कहलाए। शैव अखाड़ों की संख्या 7 हैं। इनके नाम जूना, आव्हान, अग्नि, महानिर्वाणी, अटल, निरंजनी और आनंद है। आव्हान-अग्नि जूना, अटल महानिर्वाणी और आनंद निरंजनी के साथ रहते हैं। वैष्णव के तीन अखाड़े हैं। इन्हें दिगंबर, निर्मोही और निर्वाणी अणि कहा जाता है। कालांतर में बड़ा उदासीन और नया उदासीन अस्तित्व में आए। इसके साथ ही निर्मल (सिख) अखाड़ा भी आया। इस तरह कुल 13 अखाड़े मान्यता प्राप्त हैं।

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बहुमत का गणित : 13 में से 8 अखाड़े एक साथ
महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव रवींद्र पुरी का 13 अखाड़ों में से 8 के स्थानीय प्रमुखों ने सम्मान किया। इनमें महानिर्वाणी, अटल, निर्मल, नया उदासीन, बड़ा उदासीन, निर्वाणी अणि, दिगंबर अणि और निर्मोही अणि अखाड़े के संत शामिल थे। संतों के इस समागम में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद् अध्यक्ष रवींद्र पुरी (महानिर्वाणी) का अभिनंदन किया गया। यहां मीडिया से चर्चा में रवींद्र पुरी जी ने भी खुद को अखाड़ा परिषद् का राष्ट्रीय अध्यक्ष बताया है।

प्रयागराज कुंभ में भी दो परिषद्
प्रयागराज कुंभ में भी दो अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद् कार्यरत थीं। एक का नेतृत्व रवींद्र पुरी (निरंजनी) और दूसरे का रवींद्र पुरी (महानिर्वाणी) कर रहे थे। दो समानांतर अध्यक्ष होने से तब यूपी प्रशासन ने कुंभ अपने हिसाब से कराया था। रवींद्र पुरी ( महानिर्वाणी)ने रविवार को मीडिया से कहा कि उनकी परिषद् में सभी अखाड़ों का प्रतिनिधित्व है। निर्मोही अणि अखाड़े के राजेंद्र दास परिषद के राष्ट्रीय सचिव हैं। उदासीन से उपाध्यक्ष और निर्मल से कोषाध्यक्ष हैं। दरअसल अखाड़ा परिषद में चार प्रमुख संप्रदायों—संन्यासी, उदासीन, वैष्णव और निर्मल की सहभागिता जरूरी है। पुरी के नेतृत्व वाली नेतृत्व वाली परिषद में इन चारों संप्रदायों का प्रतिनिधित्व है।

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सिंहस्थ की तैयारियों पर संतों की नजर
नेतृत्व के विवाद के बीच सिंहस्थ 2028 के आयोजन को लेकर भी संतों ने सक्रियता बढ़ा दी है। रवींद्र पुरी महाराज (महानिर्वाणी) ने मीडिया को बताया कि विकास कार्यों और व्यवस्थाओं को लेकर अधिकारियों से उनकी चर्चा हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिंहस्थ के सफल आयोजन और क्षेत्र के विकास के लिए सरकार को अखाड़ा परिषद का पूर्ण समर्थन प्राप्त है और वे लगातार प्रशासन के संपर्क में रहेंगे। पुरी ने कहा कि विचारों का मतभेद है। संत तो सभी हैं।

सभी संत भाई है
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद् (दूसरी वाली) के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी (निरंजनी) ने कहा कि सभी संत आपस में भाई-भाई हैं। कोई वर्चस्व की लड़ाई नहीं है। दो भाई भी अलग-अलग होते हैं। हमारी परिषद् के साथ भी संत हैं। सब मिलकर अच्छा सिंहस्थ कराएंगे।

जानिए दोनों अध्यक्षों के बारे में

मंशा देवीमंदिर ट्रस्ट हरिद्वार के महंत हैं रवींद्र पुरी (निरंजनी): रवींद्र पुरी (निरंजनी) हरिद्वार में स्थित मंशादेवी मंदिर ट्रस्ट के महंत हैं। उनका मूल स्थान हरिद्वार में है। उनका ट्रस्ट कॉलेज और विद्यालयों का संचालन करता है। संयुक्त अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद् अध्यक्ष नरेंद्र गिरी के निधन के बाद उन्हें अध्यक्ष चुना गया था। उनके महामंत्री जूना अखाड़े के हरिगिरि हैं। इनकी परिषद् को पांच शैव अखाड़ों (जूना, आव्हान, अग्नि, निरंजनी और आनंद) का समर्थन हैं।

दक्ष प्रजापति मंदिर के महंत हैं रवींद्र पुरी (महानिर्वाणी): रवींद्रपुरी (महानिर्वाणी) हरिद्वार में स्थित दक्ष प्रजापति मंदिर के महंत हैं। वह महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव भी हैं। वह हरिद्वार में ही रहते हैं। उन्हें हरिद्वार में अखाड़ा परिषद् का अध्यक्ष चुना गया था। इसमें शैव अखाड़े महानिर्वाणी, अटल, वैष्णव अखाड़े दिगंबर, निर्मोही, निर्वाणी, बड़ा उदासीन, नया उदासीन और निर्मल के प्रतिनिधि शामिल हैं। राजेंद्र दास् उनके सचिव हैं। इसी तरह बड़ा उदासीन से उपाध्यक्ष और निर्मल से कोषाध्यक्ष भी परिषद् में हैं।

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