हड़ताल स्थगित, अब एसी बसों में खुली लूट शुरू

हड़ताल की आड़ में पहले से बुक टिकट निरस्त किए, अब तीन-चार गुना महंगे दामों पर बेच रहे
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। प्रदेश में 2 मार्च से होने वाली बसों की अनिश्चितकालीन हड़ताल को स्थगित कर दिया गया है। शनिवार रात भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मध्यप्रदेश बस ऑनर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों के बीच हुई सकारात्मक चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया। दूसरी ओर हड़ताल का फायदा एसी व ऑल इंडिया परमिट पर चल रही निजी बस के ऑपरेटरों ने उठाना शुरू कर दिया और लोगों को पहले से बुक टिकट निरस्त कर अब तीन-चार गुना महंगे दामों पर बेचा जा रहा है।
सीएम से चर्चा के बाद हड़ताल टाली
एसोसिएशन के महामंत्री जयकुमार जैन ने बताया कि मुख्यमंत्री ने संगठन की सभी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और उन्हें मानने का भरोसा दिलाया है। सीएम डॉ. यादव ने स्पष्ट किया कि सरकार ऐसी कोई नीति नहीं लाएगी जिससे निजी बस संचालकों का आर्थिक नुकसान हो या उनका कारोबार प्रभावित हो। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने हमें भरोसा दिलाया है कि सरकार बस संचालकों का हित सुरक्षित रखेगी। उनकी सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद हमने प्रदेश हित और यात्रियों की सुविधा को देखते हुए हड़ताल स्थगित करने का निर्णय लिया है। हड़ताल स्थगित होने के बाद अब सोमवार, 2 मार्च से उज्जैन सहित पूरे प्रदेश में बसों का संचालन पूर्ववत जारी रहेगा। यात्रियों को आवागमन के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा और बस स्टैंडों पर सामान्य दिनों की तरह चहल-पहल रहेगी।
वीडियोकोच बस के टिकट महंगे
हड़ताल की घोषणा का हवाला देते हुए लंबी दूरी की बसों ने पहले से बुक यात्रियों के टिकट कैंसल कर दिए थे। होली पर घर आने-जाने वाले यात्रियों ने यह टिकट बुक कराए थे। अब यही टिकट इन यात्रियों को तीन से चार गुना महंगो दामों पर मिल रहे हैं। उज्जैन से २४ घंटे में करीब 100 से अधिक वीडियोकोच, एसी बसें गुजरती हैं। जिनका किराया आम दिन और त्योहारों के मौके पर अलग-अलग होता है। रविवार को उज्जैन से दिल्ली का 1700, मुंबई 1500, लखनऊ 2000 और मथुरा का मीनिमम किराया 1900 प्रति व्यक्ति लिया जा रहा था। जो कि आम दिनों के मुकाबले काफी अधिक है। इसी तरह पुणे, लखनऊ, जयपुर सहित अन्य शहरों के किराए में भी काफी अंतर था।
हालांकि बस ऑपरेटर एसो. के पदाधिकारियों का कहना है कि उनकी बसों के रेट शासन तय करता है और वे उससे एक रुपया भी ज्यादा नहीं ले सकते। लेकिन ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट के बस संचालक डिमांड के मुताबिक टिकट वसूलते हैं। इनको लेकर सरकार ने कोई पॉलिसी तय नहीं की है। ऑल इंडिया परमिट के नाम पर यह लोग प्रदेश में ही एक से दूसरे शहर बसें चला रहे हैं। स्टेज कैरिज परमिट की तरह सवारियों को बीच के शहरों से बैठा रहे और उतार रहे हैं।










