हाथी पर निकले बाबा महाकाल, 51 ध्वजों के साथ शाही गेर

बाबा महाकाल की ध्वज गेर में उमड़ा जनसैलाब, सीएम डॉ. मोहन यादव ने किया पूजन
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उज्जैन। रंगपंचमी पर अवंतिका नगरी में आस्था, परंपरा और शौर्य का अनूठा संगम देखने को मिला। भगवान महाकालेश्वर की पारंपरिक ध्वज गेर (वीरभद्र चल समारोह) रविवार शाम पूरी भव्यता के साथ निकाली गई। केसरिया ध्वजों, ढोल-नगाड़ों की थाप और बाबा महाकाल के जयकारों से पूरी धर्मधानी गुंजायमान हो उठी। शाम करीब 5 बजे महाकालेश्वर मंदिर से शुरू हुई इस अलौकिक यात्रा में 51 ध्वज पताकाएं श्रद्धा का प्रतीक बनकर आगे बढ़ रही थीं। हाथी पर विराजमान बाबा महाकाल के स्वरूप ने दर्शन दिए।
रथ पर स्थापित विशेष चांदी के ध्वज के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। गेर में भगवान श्रीकृष्ण-राधा, इंद्र युद्ध, गजानन गणपति और शिव-पार्वती की जीवंत झांकियों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। महाकाल मंदिर से शुरू होकर यह गेर कोट मोहल्ला, तोपखाना, दौलतगंज, कंठाल, सतीगेट, छत्री चौक, गोपाल मंदिर और गुदरी चौराहा होते हुए पुन: मंदिर पहुंची। जगह-जगह मंचों से पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया गया।
मुख्यमंत्री ने किया शस्त्र पूजन और संचालन
इससे पूर्व सुबह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महाकाल मंदिर पहुंचकर विशेष पूजा-अर्चना की। उन्होंने मंदिर के सभा मंडप में भगवान वीरभद्र का पूजन किया और चल समारोह के मुख्य ध्वज की आरती उतारी। प्राचीन परंपरा का निर्वाह करते हुए मुख्यमंत्री ने अखाड़े के शस्त्रों का पूजन किया और स्वयं तलवार व अन्य शस्त्र चलाकर शौर्य का प्रदर्शन किया। इसके पश्चात वे स्वयं ध्वज लेकर कुंड परिसर तक पहुंचे।
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