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8 दिन से लापता 3 नाबालिग लडक़ी और 2 लडक़ों को परिजन तलाश कर थाने लाए

यह कैसा पुलिस का ऑपरेशन मुस्कान?

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एसपी को आवेदन देने के बाद भी दर्ज नहीं हुई अपहरण की रिपोर्ट

अक्षरविश्व न्यूज:उज्जैन। पुलिस मुख्यालय भोपाल द्वारा प्रदेश में नाबालिगों के अपहरण, गुमशुदगी के मामलों को गंभीरता से लेकर उनकी तत्काल खोजबीन कर परिजनों के सुपुर्द करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी के तहत पुलिस द्वारा ऑपरेशन मुस्कान चलाकर वर्तमान और पूर्व में लापता हुए बच्चों की तलाश की जाती है, लेकिन शहर से 8 दिनों पहले लापता हुए बच्चों को परिजन तलाशते रहे।

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पुलिस अधीक्षक को आवेदन भी दिया और अंत में परिजन स्वयं बच्चों को तलाशकर नीलगंगा थाने पहुंचे। इतने दिनों में पुलिस ने न तो गुमशुदगी, अपहरण की रिपोर्ट दर्ज की और न ही बच्चों की तलाश के प्रयास किए। अब पुलिसकर्मी यह पता लगा रहे हैं कि बच्चे वापस कैसे मिले।

यह था मामला

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12 फरवरी को नीलगंगा थाना क्षेत्र की जबरन कॉलोनी से एक ही दिन में 3 बालिकाएं और 2 बालक लापता हुए। दो दिनों तक परिजन उनकी तलाश करते रहे और जब पता नहीं चला तो पुलिस थाने गए। पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। इन्हीं में से एक बालिका की बड़ी बहन रानी पति देवीलाल ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर 15 फरवरी 2025 को एक आवेदन दिया।

जिसमें लिखा कि मेरी 14, 15, 24 वर्षीय तीन बहनों को दो बालक बहला फुसलाकर 12 फरवरी की दोपहर 4 बजे अपने साथ ले गए हैं। जिसमें से एक बालक के भाई को यह पता है कि बच्चे कहां गए हैं। रानी ने आवेदन में यह भी लिखा कि नीलगंगा थाने में शिकायत करने गए थे लेकिन पुलिस ने सुनवाई नहीं की। जिस युवक की जानकारी पुलिस को दी उससे भी पुलिस ने पूछताछ नहीं की है। बहनों के पास मोबाइल हैं। उनको फोन किया लेकिन फोन नहीं लग रहा है। दोनों बालक मेरी बहनों के साथ कोई घटना कर सकते हैं।

दूसरे नंबर से कॉल किया तो पता चला कहां हैं बच्चे


एसपी और नीलगंगा थाने पर गुहार लगाने के बाद भी जब लापता हुए बच्चों का कोई सुराग नहीं लगा। पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की तो परिजन जिस युवक पर आरोप लगा रहे थे उसी ने अनजान नंबर से एक बालक को कॉल किया। उसे भरोसे में लेकर बातचीत की तो बालक ने बताया कि हम सूरत में हैं। युवक अपने 4-5 दोस्तों के साथ सूरत पहुंचा। वहां से दो बच्चों को लेकर उज्जैन आया। दूसरे दिन तीन बच्चे स्वयं ट्रेन में बैठकर उज्जैन आए। इसकी जानकारी मिलने पर परिजन बच्चों को लेकर स्टेशन से सीधे नीलगंगा थाने लेकर आए।

बालिका बोली- फिल्म देखने गई थी, दूसरी बोली- अस्पताल

5 बच्चों को लेकर थाने पहुंचे परिजन के सामने पुलिस ने बच्चों से पूछताछ शुरू की। एक बालिका बोली शाजापुर में रहने वाली सहेली के पास फिल्म देखने गई थी। दूसरी बोली मां को देखने अस्पताल का कहकर घर से गई थी। एक बालिका ने आरोप लगाया कि बालक शाजापुर जाने के बदले सूरत घूमने का कहकर ले गया। हालांकि सभी बच्चे एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे थे, लेकिन एक बात स्पष्ट थी कि परिजन उनकी सही समय पर तलाश नहीं करते तो अनजान शहर में उनके साथ कुछ भी घटना हो सकती थी।

वर्षों से लापता को तलाश रहे, नए केस में लापरवाही

पुलिस अफसर ऑपरेशन मुस्कान में लापता बच्चों को तलाश कर उनके परिजनों के सुपुर्द करने के समाचार प्रतिदिन प्रसारित करते हैं। इनमें कई मामले ऐसे होते हैं जिनमें बच्चे वर्षों से लापता थे जिन्हें पुलिस तलाश कर लाई, जबकि नए केस में पुलिस द्वारा किस प्रकार कार्रवाई की जा रही है इसकी पोल इसी बात से खुल जाती है कि 8 दिनों से लापता पांच बच्चों को तलाशना तो दूर उनकी गुमशुदगी या अपहरण की रिपोर्ट तक थाने में दर्ज नहीं हो पाई।

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