PM मोदी ने शुरू की “प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना” और “दलहन आत्मनिर्भरता मिशन”

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने पूसा, दिल्ली में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में देश के कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के लिए ऐतिहासिक पहल की शुरुआत की।
इस अवसर पर उन्होंने “प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना” और “दलहन आत्मनिर्भरता मिशन” का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान, राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह और रामनाथ ठाकुर समेत कई मुख्यमंत्री व जनप्रतिनिधि वर्चुअली शामिल हुए।
प्रधानमंत्री मोदी ने दलहन उत्पादक, एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) तथा पशुपालन और मत्स्य पालन से जुड़े किसानों के साथ सीधा संवाद किया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने लोकनायक जयप्रकाश नारायण और समाजसेवी नानाजी देशमुख की जयंती पर उन्हें सम्मानित कर स्मरण किया।
योजना की प्रमुख विशेषताएँ:
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना: देश के विभिन्न जिलों में कृषि विकास और किसान कल्याण के लिए 11 मंत्रालयों की 36 उप-योजनाओं को समन्वित करती है।
दलहन आत्मनिर्भरता मिशन: दालों की आयात पर निर्भरता कम करने और देश को दालों में आत्मनिर्भर बनाने का महत्वपूर्ण कदम।
प्रधानमंत्री मोदी ने कृषि अवसंरचना कोष, पशुपालन, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की 1,100 परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया, जिससे देश में 42,000 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश सुनिश्चित होगा। इससे ग्रामीण भारत में आधुनिक कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग यूनिट्स और वेयरहाउस जैसी सुविधाएँ विकसित होंगी।
किसानों का सम्मान और सशक्तिकरण:
प्रधानमंत्री ने उत्कृष्ट योगदान देने वाले किसानों, एफपीओ, सहकारी समितियों और नवाचार में अग्रणी किसानों को सम्मानित किया। इससे किसानों को सामाजिक और तकनीकी मान्यता मिली।
वित्तीय राहत और MSP:
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि यूरिया और डीएपी की कीमतों में सरकारी सब्सिडी से किसानों का बोझ कम हुआ। यूरिया की एक बोरी ₹266 और डीएपी की बोरी ₹1,350 में उपलब्ध है। साथ ही, कृषि यंत्रों पर GST दरों में कमी से किसानों को सस्ते विकल्प मिल रहे हैं।
MSP में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की गई है: गेहूं ₹160, चना ₹200+, मसूर ₹300, सरसों ₹250 और कुसुम ₹600 प्रति क्विंटल।
वित्तीय और संस्थागत मदद:
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत अब तक ₹3.90 लाख करोड़ सीधे किसानों के खातों में भेजे जा चुके हैं। किसान क्रेडिट कार्ड से वर्ष 2024-25 में ₹10 लाख करोड़ से अधिक का ऋण और ₹1.62 लाख करोड़ ब्याज सब्सिडी दी गई। फसल बीमा योजना ने ₹1.83 लाख करोड़ का मुआवजा प्रदान किया।
नवाचार और एफपीओ का विकास:
देशभर में 52 लाख किसान एफपीओ के शेयरहोल्डर बन चुके हैं। 1,100 एफपीओ ने ₹15,000 करोड़ से अधिक का टर्नओवर दर्ज किया है। कृषि मंत्रालय लगातार नवाचार और ब्रांडिंग में समर्थन दे रहा है।
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