रॉ मटेरियल के दाम दोगुने बढऩे से संकट में सबसे ज्यादा फार्मा कारोबारी, सरकारी सप्लायर परेशान

खाड़ी में जंग की तपिश से हिला उज्जैन का उद्योग जगत
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। अमेरिका, इजराइल और ईरान की जंग की तपिश से उज्जैन का उद्योग जगत भी हिल गया है। उद्योगों में उपयोग होने वाले रॉ मटेरियल की कीमतें दो से तीन गुना हो गई है और बिजनेस कैश में आ गया है। सबसे ज्यादा दिक्कत फार्मा सेक्टर में है। उसमें भी सरकारी सप्लायर मुसीबत में आ गए हैं।
उज्जैन में भी बड़े पैमाने पर इंडस्ट्रीज संचालित होती हैं। इसमें फार्मा सेक्टर काफी बड़ा है। उज्जैन की फार्मा कंपनियां देश में तो माल सप्लाई करती ही हैं, इनका माल विदेशों में भी खूब जाता है। खासकर अफ्रीकन कंट्रीज में भारत से ही दवा की सप्लाई बड़े पैमाने पर होती है। खाड़ी में जारी जंग से यह कंपनियां दबाव में आ गई हंै। इसकी दो वजह हैं। पहला दवा निर्माण में लगने वाला कच्चा माल (एपीआई) की कीमतें दोगुनी हो गई हैं। दूसरा दवाओं की पैकेजिंग करने वाले मटेरियल की कीमतें भी डबल हो गई हैं। ऐसे में कई दवाओं की कीमतें कंपनियों ने बढ़ा दी हैं।
किस मटेरियल पर कैसे पड़ी मार
दवा बनाने में अलग-अलग तरह का कच्चा मटेरियल लगता है। अधिकतर विदेशों से आता है।
मटेरियल का नाम पहले कीमत अब दाम
पैरासिटामोल 260 520
डायक्लिोफिनेम 550 850
सोडियम
एसीक्लिोफिनिक 980 1200
पीवीसी 117 152
– कीमत एक किलो की।
पैरासिटामोल और ओआरएस के दाम बढ़ाए
दर्दनिवारक के तौर पर इस्तेमाल होने वाले पैरासिटामोल के एपीआई में सबसे ज्यादा वृद्धि हुई है। ऐसे में इससे बननी वाली टैबलेट और सीरप के दाम में इजाफा किया गया है। इसी तरह ओआरएस में इस्तेमाल होने वाले साइट्रिक एसिड की कीमतें भी दोगुनी हो गई हैं। ऐसे में ओआरएस की कीमतों में इजाफा किया गया है।
क्रेडिट खत्म, अब बिजनेस नकद में
रॉ मटेरियल की कीमत में दो गुनी वृद्धि हुई है। बिजनेस में क्रेडिट भी खत्म हो गई है। माल की उपलब्धता कम होने से बिजनेस नकद में हो रहा है। पैकिंग मटेरियल की कॉस्ट भी दोगुनी हो गई है। ऐसे में कीमत बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

मुर्तजा बड़वाहवाला
एमडी, दानिश हेल्थ केयर
फार्मा इंडस्ट्रीज में प्रयुक्त होने वाली हर सामग्री की कीमत में काफी बढ़ोतरी हुई है। हर चीज के दाम बढ़ गए हैं। हालत खराब है।

रवि धींग,
एमडी, एफकॉन हेल्थ केयर
पैकेजिंग मटेरियल की कीमत में 70 फीसदी का इजाफा
खाड़ी की जंग का असर पैकेजिंग मटेरियल पर भी जमकर पड़ा है। पैकेजिंग में प्रयुक्त होने वाले कच्चे माल की कीमतों में ७० फीसदी का इजाफा हो गया है। पॉली प्रोपलीन और पॉली एथिलीन की कीमतें काफी बढ़ गई हैं।
मटेरियल का नाम पहले कीमत अब
पॉली प्रोपलीन 100 170
पॉली एथिलीन 100 170
भाव रुपए प्रतिकिलो के हैं।
हाल बुरे हैं, जंग रुके तो भी 10 महीने ठीक होने में लगेंगे: जंग का असर सारे उद्योग धंधों पर पड़ रहा है। पॉलीमर मटेरियल 70 फीसदी तक महंगा हो गया है। एक्सपोर्ट के लिए कंटेनर नहीं मिल रहे हैं। फ्लीट का किराया दोगुना हो गया है। जंग अगर आज खत्म भी हो जाए तो पहले जैसी स्थिति बनने में 10 महीने लगेंगे।

विष्णु जाजू, डायरेक्टर श्रीजी पॉलीमर
सरकारी सप्लायर्स को हो रही ज्यादा दिक्कत
फार्मा कंपनी में सबसे ज्यादा परेशानी सरकारी सप्लायर्स को आ रही है। सप्लायर्स दवाई का रेट सालभर के लिए तय करते हैं। टेंडर के मुताबिक उन्हें तय भाव पर ही दवा की सप्लाई करनी पड़ती है। ऐसे में बीच में दाम बढऩे का असर उनके इजाफे पर पड़ता है। जैसे सुपर फॉर्मुलेशन ने पैरासिटामोल का दावा टेंडर में 260 रुपए दिए था, अब रॉ मटेरियल ही 520 रुपए किलो हो गया है। ऐसे में कॉस्टिग दो गुना से ज्यादा हो गई है लेकिन टेंडर के मुताबिक उन्हें भरे भाव पर ही सप्लाई करना जरूरी है।
उज्जैन के इंडस्ट्रीयल एरिये में गैस संचालित यूनिट कम हैं। ऊर्जा संबंधित संकट नहीं है। रॉ मटेरियल महंगा होने से फार्मा और पैकेजिंग यूनिट को जरूर ज्यादा दिक्कत आ रही है।

उल्लास वैद्य
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लघुभारती









