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8 में 6 मूर्तियों का काम खत्म, दो मूर्तियां 10 दिन में होंगी पूरी, कमलासन पर विराजेंगी

पत्थर से बनी भगवान शिव सहित सप्त ऋषियों की मूर्तियों ने लिया आकार

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देव गुरु बृहस्पति की मूर्ति बनाने का काम भी शुरू

उज्जैन। श्री महाकालेश्वर मंदिर के श्री महाकाल लोक में फाइबर रिइनफोस्र्ड प्लास्टिक (एफआरपी) को हटाकर उनकी जगह पत्थर से बनी मूर्तियां लगाई जाएंगी। यह मूर्तियां इन दिनों हरिफाटक ब्रिज के नीचे स्थित जिला पंचायत के हाट बाजार परिसर में बनाई जा रही हैं। भगवान शिव सहित सप्त ऋषियों की मूर्तियां यहां बनाई जा रही हैं। इन 8 मूर्तियों में से भगवान शिव सहित पांच ऋषियों की मूर्तियों का काम पूरा हो चुका है, जबकि शेष दो ऋषियों की मूर्तियों का काम भी 10 से 15 दिनों में पूरा हो जाएगा।

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यह काम सिंहस्थ 2028 को देखते हुए तेजी से किया जा रहा है ताकि श्रद्धालुओं को स्थायित्, शास्त्रीयता और सौंदर्य का समुचित अनुभव मिल सके। बता दें कि वर्ष 2022 में महाकाल लोक के लोकार्पण के समय यहां 9 से 25 फीट ऊंची 127 से अधिक विशाल मूर्तियां स्थापित कीगई थीं जिनमें से अधिकांश एफआरपी से बनी हैं। 11 अक्टूबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाकाल लोक का लोकार्पण किया था लेकिन मई 2023 में आई आंधी के दौरान सप्त ऋषियों की 6 मूर्तियां गिरकर क्षतिग्रस्त हो गई थीं जिससे उनकी गुणवत्ता और दीर्घकालिक स्थायीत्व पर सवाल खड़े हो गए थे।

इसके बाद राज्य सरकार को आलोचना का सामना करना पड़ा। इसके बाद कुछ ही महीनों में एफआरपी से बनी मूर्तियां दोबारा स्थापित करवाई गईं। इस घटना के बाद राज्य सरकार ने नीति स्तर पर निर्णय लिया कि महाकाल लोक जैसे वैश्विक पर्यटन स्थल पर पत्थर और धातु की शास्त्रसम्मत मूर्तियां ही स्थापित की जाएं। यह घोषणा 16 अक्टूबर 2024 में सिंहस्थ 2028 के लिए गठित मंत्रिमंडल समिति की बैठक में हुई जहां इस काम के लिए 75 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई। मूर्ति निर्माण की जिम्मेदारी महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ को सौंपी गई जिसने देशभर के शिल्पकारों से प्रस्ताव आमंत्रित किए। इसके बाद ओडिशा के प्रसिद्ध शिल्पकारों का मानदेय तय कर भगवान शिव और सप्त ऋषियों की मूर्तियों का निर्माण शुरू करवाया गया।

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15 कलाकारों की टीम दिन-रात जुटी हुई

मूर्तियों को आकार देने का काम ओडिशा के रहने वाले ईश्वरचंद महाराणा और उनकी टीम ने किया है। टीम में 15 लोग शामिल हैं जो दिन-रात मूर्तियों को पूरा करने में जुटे हैं। कलाकार ईश्वरचंद महाराणा ने बताया कि भगवान शिव और सप्त ऋषियों की मूर्तियों को बनाने का काम अप्रैल 2024 से शुरू किया था। वर्तमान में 8 में से 6 मूर्तियां बनकर तैयार हैं। दो ऋषियों की मूर्तियों का काम भी अंतिम दौर में है जो करीब 10 से 15 दिनों के बीच पूरा हो जाएगा। इसके अलावा देवताओं के गुरु बृहस्पति की मूर्ति भी बनाई जा रही है। सभी मूर्तियां के लिए कमल के आकार के आसन बनाए गए हैं जिन पर मूर्तियों को विराजित किया जाएगा।

10.5 फीट की मूर्ति 4.5 फीट का आसन

कलाकार ईश्वरचंद महाराणा ने बताया कि मूर्तियां की खासियत यह है कि राजस्थान के बंशी पहाड़ पत्थर से बनाई गई है। लाल रंग का यह पत्थर बेहद मजबूत होता है। सभी मूर्तियों की ऊंचाई 10.5 फीट की है, जबकि कमल के आकार में बनाए आसन 4.5 फीट का है। भगवान शिव की मूर्ति के लिए अलग से आसन बनाया गया है।

उद्देश्य केवल मूर्तियां बदलना नहीं
सरकार का उद्देश्य केवल मूर्तियों को बदलना नहीं बल्कि महाकाल लोक की वैश्विक प्रतिष्ठा, सांसकृतिक गरिमा और दीर्घकालिक टिकाऊपन को सुनिश्चित करना है। सिंहस्थ 2028 से पहले तेजी से बढ़ते निर्माण संकेत दे दिए हैं कि महालोक का यह स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए और भी भव्य और स्थायी होगा।

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