दिगम्बर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन कार्यकारिणी की बैठक संपन्न

क्षमा मांगना और करना व्यक्तित्व विकास की प्रथम सीढ़ी
अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन: व्यक्तित्व विकास के दो स्वरूप है, एक आंतरिक व दूसरा बाह्य, आंतरिक विकास हेतु मन, वचन और काया की शुद्धता आवश्यक है। वहीं बाह्य विकास में व्यक्ति का रहन, सहन, पहनावा, चलना, अपनी बात रखने, कहने में भाषा का प्रयोग, परस्पर व्यवहार यह सब व्यक्तित्व विकास में बहुत सहायक होती है, साथ ही अपनी त्रुटियों हेतु क्षमा मांगना, व दूसरों को उनकी त्रुटियों के लिये क्षमा करना, यह व्यक्तित्व विकास की प्रथम सीढ़ी है।
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उक्त बात दिगम्बर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन, उज्जैन रीजन द्वारा महावीर तपोभूमि, उज्जैन में आयोजित व्यक्तित्व विकास की कार्यशाला में साहित्यकार, वक्ता डॉ. पिलकेंद्र अरोरा ने व्यक्त किए। द्वितीय प्रेरक वक्ता डॉ. वीरबाला छाजेड़ ने कहा कि जीवन में निरंतरता आवश्यक है। इसमें जो संघर्ष करता है, वही उस व्यक्ति के व्यक्तित्व विकास का प्रथम पायदान है। प्रवृत्ति के साथ निवृत्ति भी आवश्यक है, आत्मविश्वास जागृत होना चाहिए, आत्मज्ञान करते हुए हमें सहनशील बनना चाहिए। कार्यक्रम का आरंभ मंगलाचरण, उपरान्त अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। प्रथम सत्र में कार्यकारणी बैठक में रीजन निहित ग्रुप की गतिविधियों एवं नेतृत्व विकास सहित कई विषयों पर चर्चा हुई।
मुख्य अतिथि राकेश जैन विनायका, विशेष अतिथि कीर्ति जैन पांड्या, कार्याध्यक्ष,देवेंद्र जैन कांसल, राजेंद्र जैन थे। स्वागत भाषण उज्जैन रीजन अध्यक्ष विमल संगीता जैन ने दिया। उक्त जानकारी देते हुए रीजन सचिव प्रदीप कीर्ति जैन पांड्या एवं रीजन प्रचार सचिव विपिन जैन कासलीवाल द्वारा अवगत कराया। अतिथि परिचय नीता जैन धवल व नवीन जैन ने दिया। कार्यक्रम में विशेष सहयोग डॉ. सीके जैन कासलीवाल, प्रशांत जैन, अनिल जैन, मनीष जैन बांझल, निलेश जैन छाबड़ा,पवन किरण जैन, नरेन्द्र जैन का रहा। संचालन जम्बू जैन धवल ने किया। आभार प्रतीक जैन चौधरी ने माना।