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ताले में ‘कैद’ नीलगंगा थाना…

परिसर में बैठे वारंटी के परिजन ने बताया- आवाज लगाने और चैनल बजाने पर कोई जवाब नहीं दे रहा

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अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन:आमजन की धारणा है कि पुलिस थानों पर कभी ताले नहीं लगते हैं। मध्यप्रदेश कैडर के पूर्व आईपीएस पवन जैन की एक कविता भी है जिसमें उन्होंने कहा है कि-

” बंद हो थानों के पट ऐसा कभी होता नहीं।
शहर सोये चैन से, बस इसलिए सोता नहीं।’

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लोगों की इस धारणा और पूर्व आईपीएस की कविता की पंक्तियों को शहर के नीलगंगा थाने ने गलत साबित कर दिया। सोमवार सुबह थाने के मुख्य द्वार (चैनल गेट) पर ताला जड़ा हुआ था। भीतर कोई था या नहीं इसका पता नहीं लेकिन पुकार लगाने पर कोई जवाब भी नहीं मिल रहा था।

सोमवार सुबह करीब ८.३० बजे यह प्रतिनिधि जब रुटीन जानकारी के लिए नीलगंगा थाने पहुंचे तो वहां चैनल गेट पर ताला लगा देख आश्चर्य में पड़ गए। दरअसल कभी भी किसी ने थाने के द्वार पर ताला लगा नहीं देखा। वहीं थाना परिसर में दो लोग बैठे थे जो वारंटी के परिजन थे। उन्होंने बताया कि भीतर आवाज देने पर कोई जवाब भी नहीं दे रहा है।

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सेवानिवृत्त एडीजी पवन जैन द्वारा पुलिस सेवा में रहते हुए महकमे की कार्यप्रणाली पर कविता लिखी गई थी जिसमें उल्लेख था कि शहर में अमन और चैन बना रहे इस कारण थानों पर कभी ताले नहीं लगते। हालांकि अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं और थानों पर किन्हीं विशेष परिस्थिति नहीं बल्कि सामान्य स्थिति में भी ताले लगाये जाते हैं। इस मामले में उज्जैन एसपी का कहना है कि उन्हें थाने में ताला लगा होने की जानकारी नहीं है। वहीं एएसपी गुरुप्रसाद पाराशर ने कहा कि टीआई सर्कल में है।

वारंटी के परिजन चाय लेकर आए थे

सीताराम पिता सेवाराम निवासी शंाति नगर का वारंट था। उसे पुलिसकर्मी रात में घर से पकड़कर लाये और हवालात में बंद किया। सुबह उसकी पत्नी चंदाबाई और बेटा नागेश्वर चाय लेकर थाने पहुंचे। उनकी मंशा थी कि रात भर से हवालात में बंद सीताराम को चाय पिला देंगे।

चंदाबाई ने बताया कि आधे घंटे से थाने के बाहर बैठे हैं। चैनल गेट पर ताला लगा है। आवाज देकर अंदर के व्यक्ति को बुलाना चाहा लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। चैनल बजाने पर भी किसी का उत्तर नहीं मिला तो बाहर परिसर में ही बैठ गये। 8.45 बजे तक चैनल गेट का ताला नहीं खुला, जबकि थाने की लाईटें, वायरलेस सेट सभी चालू हालत में थे।

नियम के लिए एसपी बोले- सीआरपीसी की किताब देखें

नीलगंगा थाने में ताला लगा होने के संबंध में जब एसपी सचिन शर्मा से चर्चा की गई तो उनका कहना था कि २५० पेज की एक सीआरपीसी की किताब है। उसमें थाना बंद होने का नियम देख देख सकते हैं। नीलगंगा थाने में ताला लगा होने के संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।

विशेष परिस्थिति में ही लगा सकते हैं ताला

उज्जैन एसपी रहे और ग्वालियर रेंज आईजी से रिटायर हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एम.एस. वर्मा ने चर्चा में बताया कि थाने में ताले लगाने का कोई प्रावधान नहीं है। थाने पर आपातकालीन स्थिति या विशेष परिस्थितियों में ही ताला लगाया जा सकता है, यदि थाने की सुरक्षा को खतरा हो अथवा दुर्दांत अपराधी को शिफ्ट करना हो तभी थाने में ताले लगाये जा सकते हैं। इसके अलावा तो कोई कारण नहीं बनता कि थाने में ताला लगाया जाए।

टीआई से बात हुई है वह सर्कल में ही हैं…एएसपी

एएसपी गुरूप्रसाद पाराशर से इस संबंध में चर्चा की गई तो उनका कहना था कि स्टाफ थाने के अंदर ही है। टीआई से सुबह बात हुई थी वह सर्कल में भ्रमण कर रहे हैं। किसी कारण से ताला लगाया होगा।

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