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राष्ट्र निर्माण के लिए मातृभाषा को जानना जरूरी

विद्यार्थियों ने मातृभाषा परिसंवाद के साथ चलाया स्वभाषा हस्ताक्षर अभियान

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अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अंतर्गत शासकीय माधव विज्ञान महाविद्यालय एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास उज्जैन इकाई के संयुक्त तत्वावधान में मातृभाषा परिसंवाद का आयोजन किया गया। इसमें विद्यार्थियों ने मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, गुजरात एवं राजस्थान की वेशभूषा में अपनी मातृभाषा हिन्दी, बांग्ला, गुजराती, राजस्थानी एवं मराठी में अपने प्रांत के पर्यटन स्थलों का परिचय दिया एवं संवाद किया।

इस अवसर पर स्वभाषा हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया। अनुराग श्रीवास्तव सेवानिवृत्ति इंडियन फॉरेस्ट सर्विसेज एवं महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अर्पण भारद्वाज, प्राध्यापकगण एवं विद्यार्थियों ने स्वभाषा में हस्ताक्षर किए। अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अर्पण भारद्वाज ने कहा कि राष्ट्र के निर्माण के लिए मातृभाषा को जानना आवश्यक है। भारतीय भाषाएं राष्ट्र को एक सूत्र में जोड़ती हैं।

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संस्कृति का आदान-प्रदान होता है। विषय प्रवर्तन करते हुए कार्यक्रम संयोजक डॉ. शशि जोशी ने कहा कि मातृभाषा से सहज ही बोध होता है। अत: मातृभाषा में प्राप्त ज्ञान सदैव स्मृति में रहता है। इससे भारतीय भाषाओं का अस्तित्व भी बना रहेगा। संचालन डॉ. शशि जोशी ने किया। आभार डॉ. प्रियंका तिवारी ने माना। इस अवसर पर डॉ. मणिकांत, डॉ. जीवन सिंह सोलंकी, डॉ. प्रमिला बघेल, डॉ. पुष्पा जाटवा, डॉ. रंजना धवन, डॉ. जगदीश मसोदकर, कोमल चेलारमानी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।

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