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भाषा संस्कृति की संवाहक होती है : डॉ. नायक

माधव कॉलेज में स्वभाषा अभिमान कार्यक्रम आयोजित

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अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मातृभाषा को विशेष महत्व दिया गया है। भाषा आंदोलन में बांग्ला भाषी लोगों ने विश्व को भाषा की ताकत दिखाई है। यूनेस्को ने भाषा के महत्व को स्वीकार करते हुए अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस घोषित किया है। मां के गर्भ से ही मातृभाषा की शुरुआत होती है। व्यक्ति स्वप्न मातृभाषा में ही देखता है। संपूर्ण व्यक्तित्व का विकास मातृभाषा से ही संभव है। हमें अपनी मातृभाषा का अभिमान और गौरव होना चाहिए।

यह विचार विक्रम विवि हिंदी अध्ययनशाला की आचार्य डॉ. गीता नायक ने माधव कॉलेज में व्यक्ति किए। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास और माधव महाविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा पखवाड़े के अंतर्गत कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए दर्शनविद डॉ. शोभा मिश्रा ने कहा कि भाषा से व्यक्ति की पहचान होती है। भाषा से ही संस्कार दिखाई देते हैं। हमें अपने बोलने और लिखने में शुद्ध भाषा का उपयोग करना चाहिए।

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मातृभाषा को अभ्यास से ही निखारा जा सकता है। स्वागत वक्तव्य एवं अतिथि परिचय कार्यक्रम के संयोजक डॉ. नीरज सारवान ने प्रस्तुत किया। संचालन डॉ. जफर महमूद ने किया ।आभार डॉ. नीलिमा वर्मा ने माना। सरस्वती वंदना डॉ. नलिनी तिलकर ने प्रस्तुत की। इस अवसर पर डॉ. सीमाबाला आवास्या, डॉ. रुबीना अर्शी, डॉ. शैलजा साबले, डॉ. केदार गुप्ता, डॉ. संदीप लांडे एवं बड़ी संख्या में विधार्थी उपस्थित रहे।

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