महापौर बंगले पर हुई बैठक में फूटा गुस्सा सुबह-शाम जलप्रदाय व्यवस्था पर नाराजगी

पानी को लेकर एमआईसी और प्रशासन में टकराव, शिप्रा नदी में प्रदूषण को लेकर प्रशासन की घेराबंदी
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन:पीने के पानी को लेकर महापौर परिषद (एमआईसी) और जिला प्रशासन के बीच टकराव गहरा गया है। कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त ने एमआईसी की उपेक्षा कर शहर में सुबह और शाम दो हिस्सों में जलप्रदाय व्यवस्था लागू कर दी, जबकि एमआईसी एक दिन छोड़कर पानी सप्लाई की तैयारी में थी।

इससे महापौर मुकेश टटवाल सहित एमआईसी के अधिकतर सदस्य प्रशासन से नाराज हैं। गुरुवार को महापौर बंगले पर हुई अनौपचारिक मीटिंग में सदस्यों का गुस्सा फूटा। तय किया गया है कि अब पेयजल व्यवस्था बिगड़ी तो प्रशासन ही इंतजाम करेगा।दरअसल, कलेक्टर नीरज कुमार सिंह और निगम आयुक्त
आशीष पाठक ने एक दिन पहले ही तय किया है कि उज्जैन उत्तर क्षेत्र में सुबह और दक्षिण क्षेत्र में शाम को जलप्रदाय किया जाए। इस निर्णय से पहले महापौर और जलकार्य समिति प्रभारी प्रकाश शर्मा से भी कोई चर्चा नहीं की गई। इससे महापौर टटवाल भी नाराज हो गए हैं, क्योंकि शहर की जलप्रदाय व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए एक दिन छोड़कर जलप्रदाय की तैयारी की गई है, लेकिन इसके पहले ही प्रशासन ने एकतरफा निर्णय लेकर टकराव की लकीर खींच दी, जो आने वाले समय में और बड़ी हो सकती है। सूत्रों के अनुसार गुरुवार शाम महापौर बंगले पर एमआईसी के सदस्यों ने इस मुद्दे पर मंथन किया।
जलकार्य समिति प्रभारी प्रकाश शर्मा ने इस स्थिति से महापौर को अवगत कराया और नाराजी जताई कि जलप्रदाय व्यवस्था में प्रशासन को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। अगर पानी को लेकर कानून व्यवस्था बिगड़ती तो प्रशासन हस्तक्षेप कर सकता था, लेकिन अभी ऐसे हालात नहीं हैं फिर प्रशासन ने एमआईसी और महापौर की उपेक्षा क्यों कर दी? यह मामला संगठन में भी तूल पकड़ रहा है। प्रदेश संगठन से लेकर राष्ट्रीय नेतृत्व तक यह मामला अंदर ही अंदर जोर पकड़ रहा है।
गड़बड़ाई जलप्रदाय व्यवस्था
इस टकराव के बीच शुक्रवार को शहर की जलप्रदाय व्यवस्था कुछ गड़बड़ा गई। सांदीपनी नगर की टंकी भरी नहीं जा सकी, जिससे वार्ड 17 और 18 में पानी सप्लाई नहीं हो सका। अधिकारी वाल्व की खराबी के कारण टंकी नहीं भर पाने की बात कर रहे हैं। देवासगेट और चारधाम की पानी टंकी भी पूरी नहीं भरी जा सकी। दरअसल, एक ही दिन में सभी टंकियों को भरना पीएचई के लिए मुसीबत साबित हो रहा है।
प्रशासन को पत्र, शिप्रा की स्थिति सुधारो…
नगर निगम में जलकार्य समिति के प्रभारी प्रकाश शर्मा ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शिप्रा नदी में बढ़ते प्रदूषण को लेकर कलेक्टर को लिखे पत्र में कहा है कि कान्ह नदी के प्रदूषित पानी के कारण परेशानियां बढ़ रही है। बार बार हो रही इस समस्या का निराकरण किया जाए। इससे शहर की जलप्रदाय व्यवस्था पर भी असर पड़ रहा है। प्रशासन से कहा है कि शिप्रा नदी के दोनों किनारों पर सघन पौधारोपण किया जाए और त्रिवेणी पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाया जाए। बंद पड़ी खान डायवर्जन योजना को चालू किया जाए।
अफसर और कर्मचारी बुरे फंसे
एमआईसी और प्रशासन के बीच गहराए इस टकराव से पीएचई के अधिकारी और कर्मचारी बुरे फंस गए हैं। एक तरफ निगम आयुक्त हैं तो दूसरी तरफ महापौर और एमआईसी सदस्य। किसके आदेश को मानें और किसका नहीं। किसी एक पक्ष का आदेश पूरा नहीं होने पर कार्रवाई की तलवार लटक जाने का डर सता रहा। निगम प्रशासन इस बात के लिए प्रेशर बना रहा कि उत्तर और दक्षिण में सुबह और शाम जलप्रदाय व्यवस्था में कोई गड़बड़ी न हो। ऐसे में वाल्व खराब होने जैसी तकनीकी खराबियों को लेकर भी परेशानियों और अधिकारियों के कोपभाजन बनने का डर सता रहा।
जलप्रदाय व्यवस्था में बदलाव कर सुबह और शाम आधे-आधे हिस्से में पानी सप्लाई करने के बारे में मुझसे कोई चर्चा नहीं की गई। जलप्रदाय व्यवस्था को लेकर गंभीरता से पहले विचार करना जरूरी है। एमआईसी कई समस्याओं से वाकिफ रहती है, इसलिए समन्वय से काम होना चाहिए।-मुकेश टटवाल, महापौर
शिप्रा नदी में बढ़ते प्रदूषण के कारण समस्याएं बढ़ रही है। जलप्रदाय व्यवस्था पर असर हो रहा है। इस स्थिति से अवगत कराते हुए कलेक्टर को पत्र भेजा है।-प्रकाश शर्मा, जलकार्य समिति प्रभारी










