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देवास में रिपोर्ट देने वाले उज्जैन के नायब तहसीलदार को नोटिस

नर्सिंग कॉलेज घोटाला, राजस्व अधिकारी सरकार की रडार पर

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अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन:उज्जैन जिले में एक नायब तहसीलदार को पद से हटाने का कारण भले ही राजस्व प्रकरणों का निराकरण संतोषजनक नहीं होना बताया जा रहा है,जबकि हकीकत कुछ और है। दरअसल जिन नायब तहसीलदार को पद से हटाया गया है, उनका नाम नर्सिंग कॉलेज घोटाले में आया है। देवास में पदस्थाना के दौरार एक कॉलेज के संबंध में राजस्व रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। इसी के चलते नायब तहसीलदार को नोटिस थमाया गया है।

 

बीते दिनों लेक्टर उज्जैन नीरज कुमार सिंह द्वारा नायब तहसीलदार उंडासा तहसील वृत कार्यालय का निरीक्षण किया गया था। कार्यालय में बड़ी संख्या में राजस्व प्रकरण लंबित पाए गए थे। इसके बाद बताया गया कि राजस्व प्रकरणों का निराकरण संतोषजनक पाए नहीं पाए जाने पर कलेक्टर उज्जैन नीरज कुमार सिंह द्वारा नायब तहसीलदार उंडासा तहसील वृत उज्जैन ग्रामीण सुभाष सुनहेरे को हटाने के आदेश जारी किए हैं।

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प्रशासनिक कार्य सुविधा के दृष्टि तहसीलदार उज्जैन ग्रामीणअर्चना गुप्ता को न्यायालय वृत उंडासा का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया हैं। बता दें कि मध्यप्रदेश नर्सिंग शिक्षण संस्थाओं को मान्यता प्रदान करने के संदर्भ में गठित निरीक्षण दल में तहसीलदार, 13 नायब तहसीलदार शामिल थे। वर्तमान में उज्जैन जिले में पदस्थ नायब तहसीलदार सुभाष सुनहेरे ने देवास जिले में पदस्थाना के दौरान नर्सिंग शिक्षण संस्थाओं को मान्यता के संदर्भ में रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।

नर्सिंग कॉलेज इंस्पेक्शन में गड़बड़ी

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नर्सिंग कॉलेजों की जांच में हुए फर्जीवाड़े में अब राजस्व अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई शुरू की गई है। उस दौरान अलग-अलग जिलों में पदस्थ रहे तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को कारण बताओ नोटिस देकर जवाब मांगा गया है। उनसे पूछा गया है कि आपने जांच में जिस कॉलेज को निर्धारित मापदंडों के अनुसार बताया, वे सीबीआइ जांच में अनफिट कैसे हो गए। सूत्रों के अनुसार लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन मध्यप्रदेश नर्सिंग शिक्षण संस्थाओं को मान्यता प्रदान करने के संदर्भ में गठित निरीक्षण दल के सदस्य के रूप में त्रुटिपूर्ण निरीक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत करने वाले 14 अधिकारियों को नोटिस दिए गए हैं। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रस्ताव पर राजस्व विभाग ने उन्हें नोटिस दिया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इन्हें जारी किए गए हैं नोटिस

जिन्हें नोटिस दिया गया है उनमें पल्लवी पौराणिक तत्कालीन तहसीलदार इंदौर, अंकिता यदुवंशी, तत्कालीन नायब तहसीलदार विदिशा, ज्योति ढोके तत्कालीन नायब तहसीलदार नर्मदापुरम, रानू माल नायब तहसीलदार अलीराजपुर, अनिल बघेल नायब तहसीलदार झाबुआ, सुभाष कुमार सुनहेरे तत्कालीन नायब तहसीलदार देवास, जगदीश बिलगावे नायब तहसीलदार जिला बुरहानपुर, यतीश शुक्ला नायब तहसीलदार रीवा, छवि पंत तत्कालीन नायब तहसीलदार छिंदवाड़ा, सतेन्द्र सिंह गुर्जर तत्कालीन नायब तहसीलदार जिला धार, रामलाल पगोर नायब तहसीलदार बुरहानपुर, जीतेंद्र सोलंकी तत्कालीन नायब तहसीलदार झाबुआ, अतुल शर्मा तत्कालीन नायब तहसीलदार सीहोर एवं कृष्णा पटेल तत्कालीन नायब तहसीलदार खरगोन के नाम शामिल हैं। जल्द ही कुछ और राजस्व अफसरों को नोटिस जारी हो सकता है।

एक तहसीलदार और 13 नायब तहसीलदार निशाने पर आए

मप्र में नर्सिंग कॉलेजों को फर्जी तरीके से मान्यता और संबंद्धता दिलाने के लिए पूरा सिस्टम ही लगा हुआ था। सरकार ने नर्सिंग कॉलेज घोटाले में राजस्व अधिकारियों को राडार पर लिया है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में पदस्थ रहे एक तहसीलदार, 13 नायब तहसीलदार ने 18000 वर्गफीट की जमीन पर नर्सिंग कॉलेज नहीं थे। फिर भी रिपोर्ट में इन्हें सही बताया था। देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी को हाई कोर्ट की निगरानी में जांच सौंपी गई, लेकिन इस जांच में भी फर्जीवाड़ा हो गया। लाखों रुपए लेकर कॉलेजों को जांच में सही बताने के खुलासे के बाद राज्य सरकार ने भी मामले में ‘नोटिसÓ लिया है।

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