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पेशवाई निकली, साधु-संतों ने नीलगंगा सरोवर पर स्नान कर गंगा पूजन किया

गंगा दशमी पर उज्जैन में कुंभ जैसा नजारा

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अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन गंगा दशमी के अवसर पर रविवार को श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा नीलगंगा घाट पर सुबह से ही सिंहस्थ का नजारा देखने को मिला।गंगा अवतरण गंगा दशहरा के अवसर पर प्राचीन नीलगंगा सरोवर स्थित श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा घाट पर गंगा दशहरा उत्सव मनाया गया। इसके तहत पड़ाव स्थल नीलगंगा से निशान के साथ पेशवाई निकालने के बाद संतों ने प्राचीन नील गंगा सरोवर पर स्नान कर मां नीलगंगा का पूजन अभिषेक किया।

गंगा दशहरे के अवसर पर नीलगंगा तालाब पर सिंहस्थ की यादें ताजा हो गईं। यहां पर प्रति वर्ष श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा द्वारा मां गंगा का पूजन किया जाता है। इस दौरान यहां होने वाले आयोजन में बड़ी संख्या में संत-महात्मा शामिल होते हैं। सिंहस्थ की तरह निकलने वाली पेशवाई देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी यहां पहुंचते हैं। संत-महंतों ने निशान हाथ में लेकर बैंड-बाजे के साथ चले। वहीं, कुछ संत घोड़े पर सवार होकर हाथ में अस्त्र लिए हुए थे। यहां पर स्थित नीलगंगा सरोवर में संतों ने स्नान किया। संतों की शोभा यात्रा में बड़ी संख्या में संतों ने हिस्सा लिया। जूना अखाड़ा के राष्ट्रीय सचिव महंत रामेश्वर गिरी महाराज एवं महंत देवगिरी महाराज के अनुसार गंगा दशहरा के अवसर पर रविवार शाम को 7 बजे जूना अखाड़ा घाट पर मां गंगा की आरती की जाएगी एवं 108 फीट की चुनरी का अर्पण होगा। इसके बाद 1.25 क्विंटल हलवे का प्रसाद वितरण किया जाएगा।

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सरोवर का वर्णन है स्कंद पुराण में

प्राचीन नीलगंगा सरोवर जिसका वर्णन स्कंद पुराण के अवंतिका खंड में आता है इसी सरोवर में मां गंगा अवतरित हुई थी। इसी महत्व के मद्देनजर गंगा दशहरे के अवसर पर श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के मुख्य संरक्षक एवं अखिल भारतीय खड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमंत हरि गिरि महाराज की प्रेरणा से पेशवाई व संतों का स्नान कराया जाता है।

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नोएडा की कंपनी ने 3 दिन में की पानी की सफाई

नीलगंगा सरोवर में साधु संतों द्वारा किये जाने वाले स्नान के मद्देनजर पीएचई द्वारा सरोवर के पानी की सफाई के लिये नोएडा की कंपनी को बुलाया गया था। कार्यपालन यंत्री एन.के. भास्कर ने बताया कि नीलगंगा सरोवर में स्टोर पानी हरा होने के साथ उसमें ऑक्सीजन का लेवल भी कम था इस कारण पानी की सफाई के लिये नोएडा की कंपनी से पानी का ट्रीटमेंट कराया गया साथ ही फव्वारे भी चालू किये गये थे। सुबह संतों द्वारा साफ पानी में पर्व स्नान किया गया।

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