राम मंदिर में चंदन व चरणामृत पर प्रतिबंध से रोष, उठे विरोध के स्वर

ट्रस्ट ने प्रतिबंध लगाकर करोड़ों सनातनियों की श्रद्धा और विश्वास को ठेस पहुंचाई है
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अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन सनातन धर्म में चंदन और चरणामृत का विशेष महत्व है। जब तक मस्तक पर चंदन नहीं लगाया जाता या भगवान का तुलसी चरणामृत नहीं लिया जाता तब तक मंदिरों में दर्शन, पूजन पूर्ण नहीं होते और इसका पुण्य भी नहीं मिलता है।
अभा पुजारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश पुजारी एवं सचिव रूपेश मेहता ने बताया कि हाल ही में ज्ञात हुआ कि अयोध्या में विराजित भगवान श्रीराम मंदिर में भक्तों को चंदन लगाने और चरणामृत देने पर श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने प्रतिबंध लगाकर करोड़ों सनातनियों की श्रद्धा और विश्वास को ठेस पहुंचाई है। यह अनुचित है।
पुजारी महासंघ इसका पुरजोर विरोध करता है। प्रतिबंध का कारण दर्शनार्थियों को चंदन और चरणामृत देने से पुजारियों की अधिक आय होना व समय लगना बताया गया है तो ट्रस्ट को हमारा सुझाव है कि यदि चंदन और चरणामृत से भीड़ होती या दर्शन में समय लगता हैं तो मंदिर में रखी दान पेटियां भी हटा दी जाना चाहिए। क्योंकि दर्शनार्थीयो को जेब से पैसे निकालने व दानपेटी में डालने में भी उतना ही समय लगता हैं। यदि ऐसा होता हैं तो इस निर्णय का स्वागत है।