अब मानसून के 4 माह कान्ह के दूषित और केमिकल युक्त पानी में करना होगा स्नान

बारिश शुरू होते ही कान्ह ओवरफ्लो होकर शिप्रा में मिली : केमिकल से झाग के पहाड़ बने
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अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन:मानसून सीजन की शुरूआत हो चुकी है। अब बारिश के साथ नदी, नाले उफान पर आएंगे। ऐसे में कान्ह के दूषित पानी को शिप्रा नदी में मिलने से कोई नहीं रोक पाएगा और इसी केमिकल युक्त दूषित पानी में श्रद्धालुओं को पूरे मानसून सीजन के 4 माह स्नान, पूजन, आचमन करना होगा, खास बात यह कि इस दौरान भगवान महाकालेश्वर भी शिप्रा नदी के रामघाट पर पहुंचेंगे और यहीं पर भगवान का पूजन अभिषेक भी होगा।
अभी प्री मानसून एक्टिविटी के चलते शहर व आसपास टुकड़ों में बारिश हो रही है। प्री मानसून के पानी गिरने के दौरान ही नाले-नालियों के साथ नदी में भी पानी का स्तर बढऩे लगा है। यही कारण है कि त्रिवेणी स्थित कान्ह के दूषित पानी को रोकने के लिये बनाया गया मिट्टी का स्टॉपडेम अब किसी काम का नहीं रहा है।
उसके ऊपर से कान्ह का दूषित व केमिकल युक्त पानी बहकर सीधे शिप्रा नदी में मिल रहा है। वर्तमान स्थिति यह है कि त्रिवेणी से लेकर शिप्रा नदी के बड़े पुल तक कान्ह का पानी ओवरफ्लो होकर बह रहा है। दत्तअखाड़ा छोटी रपट के 1 फीट तक डूब चुकी है जिस कारण रपट के दोनों ओर बैरिकेड्स लगाकर लोगों का आवागमन भी बंद कर दिया गया है। कान्ह के दूषित पानी की स्थिति यह है कि गऊघाट पाले के ऊपर से झरने की तरह गिर रहे पानी से बनने वाला झाग बर्फ के पहाड़ की तरह दिख रहा है जबकि यह झाग पानी में मिले केमिकल के कारण बन रहा है।
स्नान व आचमन से हो सकती है बीमारी
केमिकल युक्त दूषित पानी में स्नान व आचमन से लोग बीमार हो सकते हैं। हालांकि शिप्रा नदी के अलग-अलग घाट पर स्नान करने वाले श्रद्धालु इस बात से अनजान हैं। वह तो श्रद्धा और आस्था के चलते नदी में स्नान व आचमन कर इसी पानी से नदी के मंदिरों में भगवान का अभिषेक भी कर रहे हैं। हालांकि बारिश के पूर्व पर्व और त्यौहारों के चलते पीएचई द्वारा शिप्रा नदी में स्टोर दूषित पानी को बहाकर नर्मदा का साफ पानी स्टोर किया जाता है, लेकिन अब बारिश सीजन में उक्त प्रक्रिया भी संभव नहीं है और मानसून सीजन के 4 माह तक नदी में यही पानी स्टोर रहेगा।









