धर्मधानी में गूंज रही घनपाठ की मंगल ध्वनि

श्रद्धालुओं की उमड़ रही भीड़, 25 दिवसीय महोत्सव का ३ जुलाई को होगा समापन
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अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन श्री ललिता त्रिपुर सुंदरी शक्तिपीठ आश्रम नृसिंह घाट पर घन पारायण महोत्सव चल रहा है। उज्जैन सहित प्रदेश के कई हिस्सों से घन पाठ का श्रवण करने जानकार विद्वान और जिज्ञासु साधक पहुंच रहे हैं। इस आवाजाही ने आश्रम का परिदृश्य भक्तिमय बन गया है। आश्रम में 9 जून से शुरू हुआ 25 दिवसीय शुक्ल यजुर्वेद का ऐतिहासिक घनपाठ 3 जुलाई तक चलेगा। घन पारायण के दौरान वेदमूर्ति ऋषभ शर्मा द्वारा वेद शास्त्र सम्पन्न अशोक शास्त्री कुलकर्णी गुरु आध्यात्मिक प्रतिष्ठान आळंदी पुणे, वेद मूर्ति महेश चन्द्रकान्त रेखे अहिल्या नगर, वेद मूर्ति देवेंद्र रामचंद्र गढ़ीकर जलगावं, वेद मूर्ति अनिल किरणपाठक आलंदी पुणे की उपस्थिति रही।
विक्रम विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. बालकृष्ण शर्मा ने वेद एवं घन पारायण का सूक्ष्म विश्लेषण सरलतापूर्वक अपने उदबोधन में किया। सच्चिदानंद गुरुजी के सरंक्षण में इस आयोजन में समर्थ गुरु, मयंक गुरु, हेमेंद्र शर्मा, अभिषेक गुरु, विश्वास शर्मा, शिवशंकर व्यास, पं. सत्यनारायण शर्मा सहित बड़ी संख्या में वेद प्रेमी और वेदपाठियों ने उपस्थिति दर्ज करवाई।
बता दें कि घनपाठ की विधा अत्यंत कठिन और समय-साध्य है। इसे सीखने के लिए एक बालक को प्रतिदिन 8 से 12 घंटे न्यूनतम 10 वर्षों तक अभ्यास करना होता है। एक वेद ऋ चा का उच्चारण सामान्यत: 40 से 60 सेकंड में होता है, जबकि घनपाठ में उसी ऋ चा के उच्चारण में चार से छ: मिनट का समय लगता है। वेदों के सही उच्चारण से सृष्टि में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जबकि त्रुटिपूर्ण उच्चारण से विकार उत्पन्न हो सकते हैं। वेदमूर्ति ऋ षभ शर्मा ने मध्यप्रदेश में शुक्ल यजुर्वेद का अध्ययन पूर्ण कर इस ऐतिहासिक एकाकी घनपारायण का आयोजन करने का संकल्प लिया है।