अटल अनुभूति उद्यान जाना है तो घर से टार्च लेकर ही आना

शाम ढलते ही अंधेरे की आगोश में होता है उद्यान
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महिलाओं व बच्चों के साथ भ्रमण के लिए आने वाले लोग हो रहे परेशान
अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन:विकास प्राधिकरण द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से वीआईपी झोन कहे जाने वाले कोठी रोड़ पर अटल अनुभूति उद्यान का निर्माण कराया गया था। इस उद्यान को विशेष तौर पर दिव्यांगजनों के लिये निर्मित किया गया लेकिन बाद में सामान्यजन का भी इसमें आवागमन शुरू हो गया।
कुछ वर्ष पूर्व विकास प्राधिकरण ने इस उद्यान को नगर निगम के हैंडओवर किया तभी से रख रखाव के अभाव में उद्यान की स्थिति बिगड़ती जा रही है। हालत यह है कि शाम ढलते ही उद्यान अंधेरे के आगोश में आ जाता है और लोगों को टार्च व लाईट्स लेकर यहां आना पड़ता है।
यह सुविधाएं थीं उद्यान में
करीब 10 करोड़ की लागत से निर्मित अटल अनुभूति उद्यान में पैदल चलने के रेम्प के अलावा दिव्यांगजनों के लिये अनुभूति उपकरण, कसरत के उपकरण के साथ ही बच्चों के लिये रस्सी से निर्मित उपकरण भी लगाये गये थे। एक्यूप्रेशर, योग, ध्यान के लिये भी यहां व्यवस्था की गई थी। रात के समय डेकोरेटिव लाइट की रोशनी में बड़ी संख्या में लोग परिवार के साथ यहां घूमने आते थे। लेकिन उक्त उद्यान नगर निगम के हैंडओवर होने के बाद से संबंधित विभाग द्वारा रख रखाव पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
यह है आज के हालात
अटल अनुभूति उद्यान में न तो पीने के पानी की कोई व्यवस्था है और रात के समय टायलेट का उपयोग भी लोग नहीं कर सकते क्योंकि टायलेट की लाईटें पिछले 25 दिनों से बंद पड़ी हैं। इसके अलावा विकास प्राधिकरण द्वारा जो डेकोरेटिव लाईटें लगाई गई थीं वह बंद हो चुकी हैं। पैदल ट्रेक की 25 से 30 लाईटें बंद हैं। रात के समय उद्यान में 500 के करीब महिला, पुरुष बच्चे प्रतिदिन भ्रमण के लिये पहुंचते हैं। लाईट बंद रहने के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
लोगों की पीड़ा- हमें घर से लाइट लेकर आना पड़ी
सिद्धार्थ अपने दोस्तों के साथ अटल अनुभूति उद्यान में वीडियो शूट करने आये थे। उन्होंने बताया कि हमें यह जानकारी थी कि इस उद्यान में डकोरेटिव लाइट्स हैं। लेकिन यहां आकर पता चला कि लाईट्स बंद हैं इस कारण घर से लाईट लेकर आना पड़ा।काव्य परमार ने बताया कि उद्यान में घास बड़ी हो चुकी है। रात के समय अंधेरा रहने के कारण जहरीले जानवरों का खतरा रहता है। उद्यान में महिलाएं, बच्चे और युवतियां भी भ्रमण के लिये आ रहे हैं ऐसे में उनकी सुरक्षा को भी खतरा बना रहता है। दिवांशु निवासी सुभाष नगर ने बताया कि न तो पीने का पानी है न ही लाईट्स है। सुरक्षा के लिये सिर्फ एक गार्ड की ड्यूटी रहती है। इतने बड़े और सुंदर उद्यान का सही तरीके से रख रखाव नहीं होने से लोग परेशान होते हैं। संबंधित विभाग को इस पर ध्यान देना चाहिये। आदित्य निवासी देसाई नगर ने बताया कि बच्चों के लिये प्ले ग्राउण्ड की रस्सीयां अनुयूसेबल हो चुकी हैं। उस पर बच्चे खेलने चढ़ते हैं तो गिरकर घायल हो जाते हैं। दिव्यांगजनों के लिये स्पेस की कमी भी नजर आते है। नगर निगम ने यहां बेंचेस लगा दी हैं।
लाइट्स बंद होने की शिकायत प्रकाश विभाग में की है
नगर निगम के झोन क्रमांक 4 में उद्यान विभाग के दरोगा रवि बागड़ी ने बताया कि अटल अनुभूति उद्यान की अधिकांश लाईट्स पिछले 20 दिनों से बंद हैं। यह हमारी जानकारी में है और इन्हें ठीक करने के लिये प्रकाश विभाग को अवगत कराया है, लेकिन अभी तक लाईट्स ठीक नहीं हो पाई हैं। सफाई प्रतिदिन होती है। बारिश का सीजन होने के कारण घासल बढ़ गई है जिसे काटा दिया जायेगा।
लाइट चालू कराएंगे
मैं स्वयं अटल अनुभूति उद्यान में प्रात: भ्रमण के लिये जाता हूं। सफाई व्यवस्था तो ठीक है, लाइट के संबंध में आपसे जानकारी मिली है जिसे ठीक करा दिया जाएगा जिससे लोगों को परेशानी नहीं होगी। -मुकेश टटवाल, महापौर