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सिंहस्थ-2028 में श्रद्धालुओं को शिप्रा नदी के जल से स्नान कराने का लक्ष्य

सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी तालाब में वर्षा जल स्टोरेज कर पाइप से शिप्रा में लाया जाएगा

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। सीएम की मंशा है कि शिप्रा सदा निर्मल एवं प्रवाहमान रहे। सिंहस्थ २०२८ में श्रद्धालुओं को शिप्रा जल से स्नान कराया जाए। जल संसाधन विभाग द्वारा सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना तैयार की गई। योजना के तहत दोनों तालाबों की जल संग्रहण क्षमता में वृद्धि कर बरसात के पानी को संग्रहित किया जाएगा। इस जल को पाइप लाइन के माध्यम से आवश्यकता अनुसार शिप्रा नदी में लाया जाएगा। सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना के लिए मंत्रि-परिषद द्वारा 614 करोड़ 53 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है।

 

सिंहस्थ से पहले सरकार यह प्रयास कर रही है कि श्रद्धालु शिप्रा नदी के जल में ही स्नान करें। सिंहस्थ 2028 में साधु-संत एवं श्रद्धालुओं को शिप्रा नदी के जल से कराने को जल संसाधन विभाग ने 61४ करोड़ रुपए से अधिक की योजना तैयार की थी। इसे सरकार ने प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान कर दी है। अब इसकी निविदा प्रक्रिया पूरी की जाएगी। योजना को धरातल पर उतराने के लिए अफसरों की इच्छाशक्ति और सक्रियता बनी रही तो कार्य अगले वर्ष शुरू हो जाएगा।

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प्रोजेक्ट की घोषणा सीएम ने की थी

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में 479 करोड़ 89 लाख रुपये की कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट परियोजना के भूमि पूजन कार्यक्रम में सेवरखेड़ी में बैराज और सिलारखेड़ी तालाब पर बांध बनवाकर आगामी सिंहस्थ का स्नान शिप्रा के जल से कराने की घोषणा की थी। सीएम डॉ.यादव ने कहा था कि ‘शिप्रा को सदानीरा रखने के लिए सेवरखेड़ी गांव में शिप्रा नदी पर बैराज बनाकर वहां से शिप्रा का पानी लिफ्ट कर सिलारखेड़ी तालाब में ले जाया जाएगा। फिर यही पानी आवश्यकता पडऩे पर पुन: शिप्रा में छोड़ा जाएगा। इससे शिप्रा का पानी शिप्रा में ही रहेगा।Ó

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यह है परियोजना

शिप्रा नदी पर उज्जैन जनपद के सेवरखेड़ी गांव में 4 मीटर ऊंचा, 180 मीटर लंबा बैराज बनाया जाएगा। यहां से सिलारखेड़ी तालाब तक 6 किलोमीटर लंबी, 1800 मिलीमीटर व्यास की पाइपलाइन बिछाकर शिप्रा में आया अतिरिक्त पानी तालाब में छोड़ा जाएगा।

तालाब की जल संग्रहण क्षमता पांच मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) से बढ़ाकर 51 एमसीएम की जाएगी। यहां 23 मीटर ऊंचा, 1200 मीटर लंबा बांध बनाया जाएगा। यहां से त्रिवेणी घाट तक सात किलोमीटर लंबी, 1800 मिलीमीटर व्यास की पाइपलाइन बिछाई जाएगी।

त्रिवेणी घाट से गऊघाट, भूखीमाता घाट, रामघाट तक शिप्रा का आंचल सूखने लगेगा तब सिलारखेड़ी तालाब से पानी शिप्रा में पाइपलाइन के जरिये भर दिया जाएगा।

सिंहस्थ-16 में स्नान के लिए लाए थे नर्मदा का जल

महाकुंभ सिंहस्थ- 2016 का स्नान सरकार ने शिप्रा नदी में नर्मदा का जल भर कराया था। ऐसा, शिप्रा के सूखने की स्थिति पर किया था। दरअसल, सरकार ने शिप्रा सर्वेक्षण रिपोर्ट देख ये भांप लिया था कि शिप्रा साल के 12 माह अपने ही जल से सदानीरा नहीं रह पाती। जनवरी से शिप्रा सूखने लगती और जून तक पूरी तरह सूख जाती। ऐसे में सिंहस्थ का साधु-संतों को स्नान कराना चुनौती थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने नर्मदा का शिप्रा से संगम कराने को 402 करोड़ रुपये की योजना को धरातल पर उतारा। 2014 में प्राकृतिक प्रवाह के जरिये और फिर 2019 में 139 करोड़ रुपये खर्च कर पाइपलाइन के जरिये नर्मदा का पानी शिप्रा में छोडऩे की व्यवस्था जमाई। 2019 के बाद जब भी शिप्रा सूखती, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण नर्मदा का पानी छोड़कर शिप्रा को नर्मदा जल से भर देती।

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