एक चोर ऐसा भी…40 चोरियां की, जेल भी गया लेकिन सभी प्रकरणों में बरी हो गया

29 साल से सिर्फ चोरी ही कर रहा है…कभी पार्टनर नहीं बनाया
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। पुलिस को अमूमन किस्म किस्म के चोरों से वास्ता पड़ता है। कुछ चोर ऐसे होते हैं जो न सिर्फ चर्चा का विषय बनते हैं बल्कि पुलिसकर्मियों के मानस पटल पर अंकित हो जाते हैं। एक चोर का किरदार ऐसा ही सामने आया है जो अब तक 40 बार चोरी की वारदातों को अंजाम दे चुका है। चोरी उसका पेशा है। बहुपत्नीधारी है। पकड़ में आने के बाद उसके माथे पर शिकन तक नहीं आती। जेल जाता है तो कभी जमानत की अर्जी नहीं देता।
भाटपचलाना पुलिस ने बदनावर के पिटगारा गांव में रहने वाले 50 वर्षीय अमरसिंह पिता गब्बा को अवैध शराब के जुर्म में गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से 70 लीटर महुए की शराब जब्त हुई। जब अमरसिंह से पुलिस ने पूछताछ की तो कई रोचक मामले सामने आए। वह धाराप्रवाह अपने चोर्य कर्म की दास्तान सुना रहा था और पुलिसकर्मी एकटक होकर सुन रहे थे। ऐसा लग रहा था मानो कोई कहानी सुना रहा हो।
जमानत पर तो कभी छूटा ही नहीं
अमरसिंह बोला, जेल में बड़ा आनंद आता है। 7 बार जेल की हवा खाई। लोगों ने कहा जमानत करवा लिया कर। नहीं कराई। अब तक वह 40 वारदातों को अंजाम दे चुका है। चोरी की वारदातों में उसने किसी को अपना साथी नहीं बनाया। वह अपने दम पर चोरियां करता था। ताले तोडऩे में उसे महारत हासिल है। रोशनदान खोलकर उसने कई वारदातों को अंजाम दिया। जब चोरी में असफल हुआ तो सोचा शराब भी बेच ली जाए। कुछ लोगों के संपर्क में आया और शराब बेचने लगा। पुलिस ने इस बार उसे पकड़ लिया
एक पत्नी रतलाम, दूसरी बडऩगर में
अमरसिंह वर्ष 1995 से चोरी की वारदातें कर रहा है। वह आशिक मिजाज भी है। उसकी एक पत्नी बडऩगर में और दूसरी रतलाम में रहती है। चोरी की वारदातों को अंजाम देने के बाद वह दोनों के पास आता जाता रहता है। मजेदार बात यह है कि आज तक उसे किसी भी जुर्म में सजा नहीं हुई। पुलिस ने उसे अब नए जुर्म में पकड़ा और जेल भेजा है। देखना यह है कि अब अमरसिंह जमानत कराता है या अवैध शराब तस्करी की सजा काट कर बाहर निकलता है।
काम में मन नहीं लगता था
अमरसिंह ने यहां से अपनी बात की शुरुआत की। वह बोला पिताजी कहते थे काम किया कर। काम में मन नहीं लगता था। गांव में छोटी-मोटी चोरी की। पकड़ में नहीं आया। हौसला बढ़ गया। पिताजी ने पिटाई भी की लेकिन वह नहीं माना। धीरे-धीरे आदत स्वभाव में बदल गई। बड़ी-बड़ी चोरियां करने लगा। चोरी उसका धंधा बन चुकी थी। वह अपने गांव से बाहर निकला पूरा रतलाम जिला, बदनावर और भाटपचलाना छान डाला। कोई ऐसा इलाका नहीं था जहां उसने चोरी नहीं की हो। चोरी में जो माल हाथ लगता उसे वह बेच देता और ऐश करता था।









