प्रदूषण में हमारा शहर: दीपावली पर पटाखों के धुएं ने रिकॉर्ड तोड़ दिया

एक रात पहले सांद्रता 132 थी जो बढक़र 269 तक पहुंच गई
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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। इस बार दीपावली का त्योहार धूमधाम से तो मना ही पटाखों ने भी रिकॉर्ड तोड़ दिया। वायु प्रदूषण २६९ एक्यूआई पर चला गया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी भी आश्चर्यचकित थे। इतने पटाखे पहले नहीं छोड़े गए। दुकानदार भी मजे में रहे, जमकर व्यापार हुआ।
दीपावली भारत का सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है कि जब हर प्रकार का व्यवसाय होता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अस्थायी दुकानदारों व रेहड़ी वालों के लिए बाजार की वसूली खत्म कर दी थी। पटाखा व्यापारियों के लिए प्रशासन ने सामाजिक न्याय परिसर, कार्तिक मेला ग्राउंड, दशहरा मैदान, नगर निगम परिसर और भरतपुरी में दुकानें लगाने की अनुमति प्रदान की थी। व्यापारियों को भरोसा था कि इस बार जबरदस्त ग्राहकी होगी, इसलिए उन्होंने भी थोक में खरीददारी की थी। आलम यह था कि पटाखा बाजार में युवाओं की भीड़ उमड़ पड़ी। हर दुकानदार ने शानदार व्यापार किया। वायु प्रदूषण की सांद्रता 31 अक्टूबर की रात 132थी जो बढ़ कर 269 तक पहुंच गई।
देर रात गूंज रही पटाखों की
इस बार कुछ पटाखे नए किस्म के भी आए हुए थे। हवा में उडऩे वाली तितली ने महिलाओं को आकर्षित किया। यह तितली आग पकडऩे के बाद हवा में उडऩे लगती थी। फुलडिय़ों की साइज भी इस बार कुछ अलग थी। युवाओं को सबसे ज्यादा रस्सी बम ही भाया। यह बम इतनी आवाज वाले थे कि देखने वालों को कान पर अंंगुली रखना पड़ी। लक्ष्मी बम और एटम बम भी खतरनाक आवाज लेेकर आए थे। रॉकेट भी खूब उड़े। पटाखों की आवाज के अलावा धुएं ने पिछले साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। पिछले साल वायु प्रदूषण मानक की बात करें तो यह सांद्रता 97.20 थी। 31अक्टूबर की रात वायु प्रदूषण की सांद्रता 132 थी। जब पटाखे खूब चलने लगे और रात धीरे-धीरे आगे बढऩे लगी तब दीपावली की रात यही सांद्रता 267 पर पहुंच गई। इसे प्रदूषण बोर्ड ने ठीक नहीं माना है।
भी ग्यारस बाकी है, ध्यान रहे- दीपावली पर पटाखे छोडऩे वालों को अब देव प्रबोधिनी एकादशी का इंतजार है। इस दिन भी दीपावली की बची हुई कसर निकाली जाती है। थैली भर कर पटाखे लाने वाले युवाओं ने दर्जनों बम अभी बचा कर रखे हैं। वह इसे ग्यारस के दिन छोडऩे वाले हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जिन लोगों को श्वांस की तकलीफ है या धुएं से एलर्जी है वे सावधानी बरतें। पटाखों का धुआं सीधे फेफड़े पर असर करता है। मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए। हो सके तो रुमाल को गीला कर लें और नाक पर रख लें। इससे काफी आराम मिलता है।









