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और भी योजनाएं हैं जो समय पर आएंगी अपने भाषण में इशारा दे गए डॉ. यादव

मेडिसिटी, मेडिकल कॉलेज का श्रेय खुद को नहीं दिया सीएम ने

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इतने बड़े आयोजन की समीक्षा भी जरूरी है

नरेंद्र सिंह अकेला उज्जैन। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने शहर को मेडिसिटी और मेडिकल कॉलेज की सौगात दे दी,लेकिन खुद को श्रेय नहीं दिया। बताया कि उज्जैन वासियों को यह सौगात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी है। इंदौर में आयोजित दीक्षांत समारोह से चले तो मन में कुछ नया करने का विचार नहीं था। जब मंच पर मांग हुई तो यह घोषणा भी कर दी कि माधव नगर थाने के सामने नया कलेक्टर भवन बनाया जाएगा।

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इस मांग को स्वीकार कर मुख्यमंत्री ने यह साबित किया कि शहर के विकास के लिए उनके कदम पीछे हटने वाले नहीं हैं। अपने भाषण में भी इस बात का उल्लेख कर गए कि इस शहर को देने के लिए बहुत सी योजनाएं हैं इंतजार करना पड़ेगा। उज्जैन में प्रायवेट सेक्टर के साथ मिलकर मेडिकल टूरिज्म की स्थापना भी की जाएगी। इस घोषणा से यह बात सिद्ध होती है कि यहां विकास के नए आयाम स्थापित होंगे। सुविधाएं परवान चढ़ेंगी।

सीएम ने यह भी बताया कि यहां हाईटेक स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ-साथ मेडिकल डिवाइस पार्क भी बनाया जाएगा। एक ही परिसर में सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हाई राइज बिल्ंिडग बनाई जाएगी। यानी घोषणा से पहले पूरी तैयारी की गई थी। मेडिकल क्षेत्र के अनुभवी रणनीतिकारों के साथ मीटिंग की गई। पहले खुद ने पूरे प्लान को समझा इसके बाद कलेक्टर नीरज सिंह को जानकारी दी गई।

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कलेक्टर ने मीडिया को बताया कि उज्जैन में मेडिकल कॉलेज और ेमेडिसिटी की स्थापना की जाएगी। आयुर्वेद के 5 मेडिकल कॉलेज शुरू कर रहे हैं। इससे यकीनन उन लोगों को फायदा होगा जो एलोपैथिक इलाज से परहेज करते हैं। आज भी हमारे परिवार में बुजुर्ग वैद्य जी के पास जाना ही पसंद करते हैं। लेकिन आजकल आयुर्वेद का इलाज भी बदल गया है। यह पैथी सिर्फ चूर्ण तक सीमित नहीं रही। इसकी गोलियों की पैकिंग एलोपैथिक दवाओं की पैकिंग को मात दे दी हैें। उज्जैन में हौम्योपैथी महाविद्यालय भी शुरू कर रहे हैं। यह भी शहर के लिए एक बड़ी उपलब्धि ही होगी।

जनप्रतिनिधि पीछे क्यों रह गए, बड़ा सवाल

उज्जैन में मेडिकल कॉलेज और मेडिसिटी का भूमि पूजन। शहर में इससे बड़ा कोई इवेंट नहीं हो सकता। जिला प्रशासन जिस मुस्तैदी से लगा रहा और आयोजन को सफल करके दिखाया वह प्रशंसनीय है। कतिपय जनप्रतिनिधियों को जिस तरीके से सक्रिय होना था वह सक्रियता देखने में नहीं आई। संभव है कि सीएम तक पूरी रिपोर्ट पहुंची होगी।

सीएम के सिपहसालार पूरे कार्यक्रम की समीक्षा करें। अनुभवी लोगों से चर्चा की जाए। सीएम को दिखाने के लिए आयोजन स्थल के आसपास पोस्टर लगा देना, होर्डिंग लगा देना ही खुशी का इजहार नहीं है। खुशी जताने के बहुत से तरीके होते हैं। चामुंडा माता भक्त समिति ेने नि:शुल्क चाय वितरण की व्यवस्था की थी। प्रसन्नता का यह भी एक भाव था।

बहरहाल, कार्यक्रम सौ प्रतिशत सफल रहा। शहर के लोगों में खुशी है कि उन्हें मेडिकल कॉलेज मिलने वाला है। अपने शहर के ही बच्चे मेहनत करेंगे, हो सकता है कि उन्हें ही अपने कॉलेज में एडमिशन मिल जाए। वे यहीं पर रह कर डॉक्टर बन जाएं और लोगों की सेवा करें।

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