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जलसंकट की दस्तक… उंडासा खाली, गंभीर और साहिबखेड़ी के भरोसे शहर की जलप्रदाय व्यवस्था

एक दिन छोडक़र पानी देने पर फैसला टला, नर्मदा से पानी लेने पर चल रहा मंथन

अक्षरविश्व न्यूज:उज्जैन। हर साल की तरह इस वर्ष भी शहर जलसंकट के मुहाने पर खड़ा हो गया है। ऐसी स्थिति में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी संधारण खंड नगर पालिक निगम द्वारा शहर में एक दिन छोडक़र जलप्रदाय किया जाता रहा है।

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इस वर्ष भी जलसंकट की आहट होते ही अफसरों ने प्लान बनाकर जनप्रतिनिधियों के सामने रख दिया। हालांकि इस पर निर्णय नहीं हुआ है, लेकिन शहर में जलप्रदाय के मुख्य स्त्रोत गंभीर डेम, साहिबखेड़ी तालाब में स्टोर पानी कम होता जा रहा है वहीं उंडासा तालाब में स्टोर पानी खत्म हो गया है। चैनल कटिंग कर पेयजल टंकी को भरा जा रहा है।

कैसे होता है शहर में पेयजल सप्लाय

पीएचई द्वारा गंभीर डेम से पानी लेकर शहर की 44 पेयजल टंकियों को भरा जाता है। दक्षिण क्षेत्र की टंकियों को भरने के लिए गंभीर का पानी पाइप लाइन के जरिए गऊघाट फिल्टर प्लांट तक लाने के बाद इससे टंकियां भरी जाती हैं। साहेबखेड़ी तालाब से पानी लेकर खिलचीपुर, कानीपुरा, इंदिरा नगर की दो टंकियों के साथ ही सम्पवेल भी भरा जाता है। उण्डासा तालाब से पानी लेकर शंकरपुर स्थित टंकी को भरा जाता है। इस टंकी से शंकरपुर सहित पंचकुआ, पंवासा, पीटीएस, दुग्ध संघ, माधोपुरा व मैत्रीकुंज तक पेयजल सप्लाय किया जाता है।

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यह है पेयजल सप्लाय के स्त्रोतों की स्थिति

पूरे शहर में पेयजल प्रदाय के लिए गंभीर डेम से लगभग 10 एमसीएफटी पानी लिया जाता है। इसके अलावा साहेबखेड़ी तालाब से 4 टंकियां व एक सम्पवेल भरने के लिए 7 एमएलडी पानी लिया जाता है। उण्डासा तालाब के पानी से एक टंकी को भरा जाता है, लेकिन वर्तमान में उक्त तालाब में पानी खत्म हो चुका है।

पीएचई अफसरों ने बताया कि गंभीर डेम में फिलहाल 937 एमसीएफटी पानी स्टोर है। साहेबखेड़ी तालाब में 148.19 एमसीएफटी पानी स्टोर है। उंडासा तालाब खाली होने पर अब साहेबखेड़ी का पानी उंडासा तालाब तक पहुंचाएंगे जिससे एक टंकी को भरा जाएगा। खास बात यह कि गंभीर डेम में स्टोर कुल 937 एमसीएफटी पानी में से 100 एमसीएफटी डेड स्टोर में है जिसे पेयजल प्रदाय के उपयोग में नहीं लिया जाता।

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नर्मदा का पानी लाना मुश्किल

नगर निगम आयुक्त द्वारा प्रस्तावित एक दिन छोडक़र जलप्रदाय के प्रस्ताव को जनप्रतिनिधियों ने साइड में रख दिया है। उनके द्वारा जलसंकट की स्थिति में नर्मदा का पानी लाकर शहर में प्रतिदिन जलप्रदाय की योजना पर मंथन किया जा रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि नर्मदा का पानी गऊघाट स्टापडेम तक लाना मुश्किल है।

इसके पीछे कारण यह है कि त्रिवेणी स्टापडेम स्थित नर्मदा की पाइप लाइन से पानी को बहाकर गऊघाट तक लाना होगा। इसमें सबसे बड़ी समस्या कान्ह का दूषित पानी है। पिछले वर्ष भी पीएचई अफसरों ने नर्मदा का पानी पेयजल प्रदाय के उपयोग का प्रयोग किया था लेकिन कान्ह का दूषित पानी ओवर फ्लो होकर साफ पानी में मिल गया जिसके बाद टेस्टिंग में वह पानी जलप्रदाय के योग्य भी नहीं बचा था।

हैंडपंप, बोरिंग, कुएं व अन्य जलस्त्रोत की अनदेखी

शहर में लोगों की सुविधा के लिए पीएचई द्वारा 300 से अधिक हैंडपंप व बोरिंग कराए गए हैं। बोरिंग में मोटर लगाकर पाइप लाइन के माध्यम से मोहल्लों कालोनियों के लोगों को सुविधा दी गई है। इसके अलावा शहर में आधा दर्जन से अधिक ऐसे कुएं भी हैं जिनमें 12 माह तक पानी भरा रहता है। उक्त हैंडपंप और बोरिंग की स्थिति वर्तमान में यह है कि किसी की मोटर खराब है तो किसी में स्र्टाटर ही नहीं है। अनेक हैंडपंप भी बंद हालत में हैं। विभाग द्वारा संभावित जलसंकट के मद्देनजर अब तक अन्य जलस्त्रोत की सुध नहीं ले पाया है।

इनका कहना

एक दिन छोडक़र जलप्रदाय के प्रस्ताव पर अभी निर्णय नहीं हुआ है। शहर में नियमित जलप्रदाय के अन्य विकल्प पर चर्चा हो रही है। यदि अन्य स्त्रोत से पानी मिल जाता है तो शहर में नियमित जलप्रदाय होता रहेगा। केदार खत्री ईई पीएचई

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