भारतीय मुद्रा पर भारत माता पहली बार दिखीं

आरएसएस शताब्दी पर सिक्का, डाक टिकट जारी, प्रधानमंत्री बोले
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सरकार्यवाह होसबाले ने कहा- संघ किसी का विरोधी नहीं

नईदिल्ली, एजेंसी। पीएम नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा, आज आरएसएस से जुड़ा सिक्का जारी किया गया है। सिक्के पर एक तरफ राष्ट्रीय चिह्न है, दूसरी तरफ सिंह पर विराजमान भारत माता की छवि और संघ के कार्यकर्ता दिखाई देते हैं। ऐसा भारतीय मुद्रा पर भारत माता की छवि स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार हुआ है। इस सिक्के पर पर संघ का बोध वाक्य भी है।
संघ देशसेवा में जुटा
संघ के शताब्दी समारोह में पीएम ने आरएसएस के योगदान को दर्शाने वाला स्मारक डाक टिकट भी जारी किया। उन्होंने कहा कि संघ के स्वयं सेवक लगातार देशसेवा में जुटे हैं। समाज को सशक्त कर रहे हैं, इसकी भी झलक इस डाक टिकट में है। मैं इसके लिए देश को बधाई देता हूं। संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा संघ किसी का विरोधी नहीं है।
संघ राष्ट्र निर्माण करता रहा
पीएम ने कहा, जिन रास्तों में नदी बहती है,उसके किनारे बसे गांवों को वह सुजलां सुफलां बनाती है। वैसे ही संघ ने किया। जिस तरह नदी कई धाराओं में अलग अलग क्षेत्र में पोषित करती है,संघ की हर धारा भी ऐसी ही है। समाज के कई क्षेत्रों में संघ लगाातार काम कर रहा है। संघ की एक धारा, बंटती तो गई, लेकिन उनमें कभी विरोधाभास पैदा नहीं हुआ, क्योंकि हर धारा का उद्देश्य, भाव एक ही है, राष्ट्र प्रथम। अपने गठन के बाद से ही आरएसएस विराट उद्देश्य राष्ट्र निर्माण का लेकर चला। इसके लिए व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण, की पद्धति वाली शाखा चुनी गई। उन्होंने कहा, हेडगेवार कहते थे, जैसा है वैसा लेना है, जैसा चाहिए वैसा बनाना है। लोकसंग्रह का तरीका समझना है तो कुम्हार को देखते हैं। जैसे ईंट पकाना है तो पहले मिट्टी लाता है, आकार देता है, खुद भी तपता है, ईंट भी तपाता है। ऐसे ही हेडगेवार जी बिल्कुल सामान्य व्यक्ति को चुनकर देश के लिए तैयार करते थे। संघ के बारे में कहा जाता है कि इसमें सामान्य लोग मिलकर असामान्य काम करते हैं। संघ ऐसी भूमि है, जहां से स्वयं सेवक की अहं से वयं की यात्रा शुरू होती है।
आपदा में स्वयं सेवक सबसे आगे खड़े थे
पीएम ने कहा, विभाजन की पीड़ा ने लाखों परिवारों को बेघर किया। स्वयं सेवक सबसे आगे खड़े थे,यह केवल राहत नहीं राष्ट्र की आत्मा को संबल देने का काम था। 1956 में अंजार के भूकंप में भी स्वयं सेवक राहत बचाव में जुटे थे। गुरुजी ने लिखा था, किसी दूसरे के दु:ख को दूर करने के लिए खुद कष्ट उठाना निस्वार्थ हृदय का परिचायक है। पीएम ने कहा, राष्ट्र साधना की यात्रा में ऐसा नहीं कि संघ पर हमले नहीं हुए, आजादी के बाद भी संघ को मुख्य धारा में आने से रोका गया।









