सामूहिक विवाह में अब तुरंत मिलेगा प्रमाण-पत्र, हर शादी का होगा पंजीयन

योजना एवं आर्थिक सांख्यिकी विभाग ने शुरू की विशेष मुहिम
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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। देवउठनी एकादशी के साथ ही विवाहों का सिलसिला शुरू हो चुका है, जिसके मद्देनजर योजना एवं आर्थिक सांख्यिकी विभाग ने एक सराहनीय मुहिम शुरू की है। विभाग ने विवाहों का शत-प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी किए हैं। जिला प्रशासन ने इस दिशा में तैयारी शुरू कर दी है और प्रत्येक सामूहिक विवाह में मौके पर ही प्रमाण पत्र देने की तैयारी की है। इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य भविष्य में दंपत्तियों को, विशेषकर महिलाओं को, कानूनी अड़चनों का सामना करने से बचाना है।
लक्ष्य प्राप्ति के लिए विशेष अभियान
आयुक्त आर्थिक एवं सांख्यिकी विकास मिश्रा ने विवाह पंजीयन के लक्ष्य को शत-प्रतिशत प्राप्त करने अभियान शुरू करने का निर्देश जारी किया है। इसके तहत मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, मुख्यमंत्री निकाह योजना एवं अन्य सामूहिक विवाहों में कार्यक्रम स्थल पर ही विवाह प्रमाण पत्र प्रदान किए जाने का सुझाव दिया गया है। इससे पंजीयन प्रक्रिया सरल होगी। आयुक्त ने सामूहिक विवाह कराने वाली सभी संस्थाओं से जागरूकता बढ़ाने और इस मुहिम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है।
मैरिज गार्डों में होर्डिंग अनिवार्य
स्थानीय निकायों, सार्वजनिक स्थलों, शादी हॉल और मैरिज गार्डन में अनिवार्य रूप से विवाह पंजीयन करवाने संबंधी होर्डिंग लगाने के निर्देश जारी किए गए हैं। यह पहल विवाह पंजीयन को अनिवार्य बनाने और समाज के कमजोर वर्गों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
पंजीयन क्यों है जरूरी
मध्यप्रदेश विवाह रजिस्ट्रेशन नियम 2008 के तहत राज्य के भीतर भारत के नागरिकों के बीच हुए किसी भी विवाह का पंजीयन आवश्यक है। पंजीयन न होने पर महिलाओं को विशेष तौर पर निम्नलिखित परेशानियों का सामना करना पड़ता है-
स्वत्वों का भुगतान- पति की मृत्यु के बाद उनको मिलने वाले स्वत्वों के भुगतान और क्लेम आदि में गंभीर परेशानी होती है।
कानूनी मान्यता- विवाह की कानूनी और आधिकारिक मान्यता के लिए पंजीयन अनिवार्य है।









