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प्रकाश पर्व… कीर्तन से गूंजी गलियां अलसुबह गुरुद्वारों से निकली प्रभातफेरी

दूधतलाई गुरुद्वारा पर प्रभातफेरियों का समापन, कल निकलेगा नगर कीर्तन

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। प्रकाश पर्व के मौके पर बुधवार अलसुबह शहर के गुरुद्वारों से प्रभातफेरियां निकाली गईं जिनका समागम चामुंडा माता चौराहे पर हुआ। फिर सभी प्रभातफेरियां एक स्वरूप में दूधतलाई स्थित गुरुद्वारा पहुंची जहां स्वागत-सम्मान के बाद समापन हुआ। प्रभातफेरी के कीर्तन की गूंज शहर के हर प्रमुख मार्ग पर गूंजती रही।

बुधवार अलसुबह गुरुद्वारा नानाखेड़ा, पटनी बाजार, गीता कॉलोनी और दूधतलाई से प्रभात फेरियों की शुरुआत हुई जो कीर्तन करती हुई विभिन्न मार्गों से होती हुई 5.30 बजे चामुंडा माता चौराहे पर एकत्रित हुई। समागम के बाद यहां से सभी प्रभातफेरियां एक साथ दूधतलाई गुरुद्वारा पहुंची। 6.15 बजे दूधतलाई गुरुद्वारा पर स्वागत व सम्मान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इसके बाद गुरुद्वारों में कीर्तन-अरदास व अन्य धार्मिक आयोजन हुए।

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5 दिवसीय प्रकाश पर्व कल दोपहर नगर कीर्तन
गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में दूधतलाई स्थित गुरुद्वारे में पांच दिवसीय महोत्सव 23 दिसंबर से प्रारंभ हो गया है। इसके तहत 25 दिसंबर को दोपहर 2 बजे नगर कीर्तन निकाला जाएगा। नगर कीर्तन फ्रीगंज स्थित गुरुद्वारा से प्रारंभ होगा और शहर के प्रमुख मार्गों से होता हुआ शाम 7 बजे दूधतलाई गुरुद्वारे पर समाप्त होगा।

ठंडे बुर्ज की यातनाओं को महसूस करने के लिए बिना छत के पांडाल में बैठी संगत

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धर्म और मानवता की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले दशमेश पिता गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादों की शहादत को नमन करने के लिए शिप्रा तट पर मंगलवार की रात एक हृदयस्पर्शी आयोजन हुआ। गुरुद्वारा श्री गुरुनानक घाट पर ‘एहसास-ए-ठंडा बुर्ज’ कार्यक्रम के तहत संगत ने कड़ाके की ठंड के बीच खुले आसमान के नीचे बैठकर साहिबजादों के बलिदान को याद किया। सिख समाज के संभागीय प्रवक्ता एस.एस. नारंग ने बताया कि छोटे साहिबजादों (बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतह सिंह) को मुगल हुकूमत ने ठंडे बुर्ज में बिना किसी वस्त्र या बिछौने के कैद रखा था। उस अमानवीय कष्ट को थोड़ा सा महसूस करने के उद्देश्य से रात 8 से 10 बजे तक पांडाल को खुला रखा गया।

इस दौरान मुख्य ग्रंथी ज्ञानी सुरजीत सिंह ने साहिबजादों के बलिदान की वीरगाथा सुनाई जिसे सुनकर संगत की आंखें नम हो गईं। भाई कंवलदीप सिंह के जत्थे ने वैराग्यमयी कीर्तन के जरिए माहौल को भक्तिमय बना दिया। कथा के दौरान ज्ञानी जी ने कहा कि यह शरीर परमात्मा की अमानत है और इसे गुरु की मर्जी के अनुसार प्रभु सिमरन में लगाना चाहिए। उन्होंने सिखों के चौथे गुरु श्री गुरु रामदास साहिब की स्तुति में शबद गायन भी किया। इस अवसर पर गुरुसिंघ सभा के अध्यक्ष इकबाल सिंह गांधी, संभागीय अध्यक्ष सुरजीत सिंह डंग सहित समाज के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और समाजजन उपस्थित रहे।

26 को शौर्ययात्रा और 27 को मुख्य आयोजन

5 दिवसीय महोत्सव के तहत 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस पर सुबह 10 बजे फ्रीगंज गुरुद्वारा सुख सागर से शौर्ययात्रा निकलेगी जो बुधवारिया स्थित गुरुद्वारा माता गुजरी पर समाप्त होगी। २७ को जन्मोत्सव मनेगा। मुख्य कार्यक्रम के तहतदूधतलाई गुरुद्वारे में सुबह शबद कीर्तन और दोपहर में लंगर होगा।

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