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दरवाजा तोड़ा, फंदे से उतारा सीपीआर देकर बचाई जान

नागदा थाना प्रभारी की तत्परता ने बचा लिया घर का इकलौता चिराग

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अक्षरविश्व न्यूज|उज्जैन। नागदा में सोमवार देर रात थाना प्रभारी अमृतलाल घावरी की तत्परता और चिकित्सकीय सूझबूझ ने एक युवक की जान बच गई। हालात ऐसे थे कि कुछ पलो की देरी हो जाती है तो युवक हमेशा के लिए परिवार से दूर जा चुका होता। इसे परिवार की खुशकिस्मती ही कहा जाएगा कि जब घर का बेटा फांसी के फंदे पर झूल रहा था, थाना प्रभारी घावरी वहां से महज 100 मीटर दूर मौजूद थे।

घटना रात करीब 12.45 बजे की है। रात्रि गश्त के लिए निकले नागदा थाना प्रभारी अमृतलाल घावरी अपनी गाड़ी से गलियों में घूमते हुए इमली तिराहा पुरानी पानी की टंकी के नजदीक पहुंचे। एक शख्स दौड़ता हुआ आया और हाथ जोडक़र बोला- साहब, मेरे बच्चे को बचा लीजिए। उसने खुद को कमरे में बंद कर लिया है, फांसी लगा रहा है।

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टीआई घावरी बिना देर किए दौड़े। मकान के बंद दरवाजे को पैरो से तोड़ा। अंदर एक युवक फंदे पर लटका था, उसके हाथ-पांव कडक़ हो चुके थे। टीआई ने तुरंत फंदा काटा और युवक को नीचे उतारकर एक से डेढ़ मिनट तक लगातार सीपीआर दिया, एकाएक युवक की सांसें लौट आईं। युवक को तुरंत रतलाम हॉस्पिटल ले जाकर इलाज कराया। रात ढाई बजे उसे अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई। तब तक टीआई घावरी भी अस्पताल में मौजूद रहे।

संपत्ति का विवाद दे जाता जिंदगी भर का दर्द

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नागदा में पुरानी पानी की टंकी इमली तिराहा के पास रहने वाले प्रवीण यादव के 20 साल के बेटे धैर्य के साथ यह घटनाक्रम हुआ। आर्थिक रूप से सक्षम इस परिवार के सभी सदस्य संयुक्त रहते हैं। खुद प्रवीण भी प्राइवेट नौकरी करते है। धैर्य ने पढ़ाई छोड़ दी थी। पुलिस के पास शुरुआती जानकारी आई कि धैर्य परिवार का इकलौता बेटा है, दादी का लाड़ला। टीआई ने बताया कि पैतृक संपत्ति को लेकर आए दिन होने वाले विवाद की वजह से धैर्य ने अवसाद में आत्महत्या जैसा कदम उठाया था।

काम आ गई ट्रैनिंग

डीजीपी के निर्देश के बाद इसी साल पुलिसकर्मियों को सीपीआर व अन्य इमरजेंसी मदद संबंधी ट्रेनिंग दी गई थी। टीआई घावरी ने भी ट्रेनिंग में सीपीआर देना सीखा था। उनकी यह ट्रेनिंग जान बचाने के काम आई।

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