शुभ संयोग… 95 साल में 13वीं बार गुरुवार को नववर्ष का शुभारंभ, इस दिन हिंदू धर्म में व्रत रखना होगा श्रेष्ठ

नए साल में 19 मार्च को गुड़ीपड़वा पर हिंदू नववर्ष का शुभारंभ और साल का अंतिम दिन भी गुरुवार
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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। 1 जनवरी 2026 को नववर्ष की शुरुआत संयोगवश गुरुवार से होगी। खास बात यह है कि जब 1 जनवरी गुरुवार को पड़ती है तो इसे ज्योतिष और पंडित विशेष शुभ मानते हैं। अनूठा संयोग यह भी बन रहा है कि आगामी 19 मार्च को गुड़ीपड़वा पर हिंदू नववर्ष का शुभारंभ भी गुरुवार को ही होगा। इसके अलावा नए साल के अंतिम दिन 31 दिसंबर 2026 को भी गुरुवार रहेगा। पिछले 95 सालों में 1 जनवरी पर गुरुवार को नया साल शुरू होने का संयोग केवल 12 बार ही बना है। अब 2026 में यह आंकड़ा 13वीं बार हो जाएगा।
खास बात यह भी है कि गुरुवार को सनातन धर्म में आस्था, ज्ञान, दान और शुभ कार्यों का प्रतीक माना जाता है। ज्योतिषियों का मत है कि गुरुवार को नए साल की शुरुआत होने का अर्थ है कि अंकों के गणित से भले सूर्य का वर्ष हो लेकिन इस पर गुरु का आधिपत्य भी रहेगा और धर्म एवं अध्यात्म के क्षेत्र में कई शोधपूर्ण काम होते नजर आएंगे। वजह यह है कि बृहस्पति देवताओं के गुरु, ज्ञान, धर्म, नीति और विस्तार के कारक माने गए हैं।
कब-कब गुरुवार से शुरू हुआ नया साल
ज्योतिषियों के अनुसार एक शताब्दी यानी पिछले 100 वर्षों में 1926 से 2025 के बीच 1 जनवरी को 12 बार ऐसा हुआ जब नया साल गुरुवार के दिन शुरू हुआ। इस बार 1 जनवरी 2026 को 13वीं बार नए साल की शुरुआत होने जा रही है।
1 जनवरी को कब कब गुरुवार था
1931, 1942, 1953, 1959, 1970, 1976, 1981, 1987, 1998, 2004, 2009 और 2015। अब अगला ऐसा संयोग वर्ष 2043 में बनेगा। गुरुवार से शुरू होने वाले वर्ष को ज्ञान, धर्म और आर्थिक स्थिरता का सूचक वर्ष माना जाता है।
व्रत रखना श्रेष्ठ
पंडितों के मुताबिक बृहस्पति को देवगुरु और धर्म का संरक्षक माना गया है। सनातनी लोग इस दिन भगवान विष्णु, बृहस्पति और सत्यनारायण भगवान की पूजा करते हैं। पीले वस्त्र, चने की दाल, हल्दी, गुड़ और पीले फूल का दान भी इस दिन विशेष पुण्यकारी माना जाता है। कई लोग गुरुवार को व्रत रखते हैं। देवताओं को नीति, धर्म और ज्ञान का उपदेश देने वाले गुरु बृहस्पति ही माने जाते हैं।
गुरु बृहस्पति क्या हैं
गुरु बृहस्पति सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है। यह एक गैसीय ग्रह है, जिसका कोई ठोस तल नहीं है। पंडितों के अनुसार, धर्म ग्रंथों में श्लोक है गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वर: अर्थात गुरु को साक्षात ईश्वर का स्वरूप माना गया है। गुरु बृहस्पति इसी गुरु तत्व के प्रतीक हैं। गुरुवार से शुरू होने वाले वर्ष को धर्म, शिक्षा और विकास उन्मुख वर्ष माना जाता है।









