नए साल में नया दिखेगा उज्जैन, शहरवासियों को मिलेगा सुकून…

2026 में शहर को बदल देंगे ये प्रोजेक्ट
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उज्जैन। शहर मेें निर्माण कार्यों के किए जा रहे दावे अगर समय पर पूरे हो जाते हैं तो 2026 में उज्जैन नए स्वरूप में दिखाई देगा। यह प्रदेश का पहला शहर होगा जहां 5,000 साल पुरानी सभ्यता और 21वीं सदी की आधुनिकता कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगी। चाहे रोप-वे हो, सिक्स-लेन की रफ्तार हो, या शिप्रा तटों पर होने वाली आरती की गूंज हो-शहर की सुंदरता हर कोने से निखरेगी। यह एक शहर होगा जो न केवल करोड़ों श्रद्धालुओं का स्वागत करने में सक्षम होगा, बल्कि उन्हें ऐसी सुंदरता का अहसास कराएगा जो उन्होंने पहले कभी नहीं देखी होगी। 2026 में उज्जैन सचमुच स्वर्णिम अवंतिका के ऐतिहासिक नाम को सार्थक करता नजर आएगा। 2026 में उज्जैन शहर का स्वरूप काफी बदला नजर आएगा। सिंहस्थ के लिए चल रहे विकास कार्य शहर की दशा और दिशा बदलने वाले हैं। इनसे उज्जैन एक नए रूप में नजर आने वाला है। 2026 में शहर के अधिकांश बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स तैयार हो चुके होंगे या होने की स्थिति में होंगे।
प्रवेश द्वारों में दिखेगी शहर की भव्यता
2026 में उज्जैन के रास्ते बदले नजर आएंगे। मुख्य प्रवेश मार्गों पर विशाल थीम बेस्ड द्वार होंगे, जो विशेष रोशनी से जगमगाएंगे। ये द्वार मालवा की वास्तुकला और धार्मिक प्रतीकों से सुसज्जित होंगे। पुराने संकरे रास्ते बीते दिनों की बात होंगे। इंदौर-उज्जैन सिक्सलेन दिसंबर 2026 तक पूरी तरह तैयार हो जाएगा। 1,672 करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से इंदौर एयरपोर्ट से उज्जैन का सफर मात्र 45 मिनट का रह जाएगा।
हवा में उड़ता रोप-वे देगा शहर को नया लुक
2026 की सबसे बड़ी खूबसूरती उज्जैन के आसमान में नजर आएगी। उज्जैन रेलवे स्टेशन से महाकाल मंदिर (गणेश कॉलोनी) तक बन रहा 1.76 किलोमीटर लंबे रोप-वे को अक्टूबर 2026 तक चालू करने का दावा किया जा रहा है। इसमें 48 केबिन होंगे, जो प्रति घंटे हजारों श्रद्धालुओं को स्टेशन से मंदिर तक ले जाएंगे। हवा से गुजरते हुए इन केबिनों से पुराने शहर और महाकाल लोक का अद्भुत विहंगम दृश्य दिखेगा।
क्षिप्रा का रिवर फ्रंट और क्लीन वाटर कॉरिडोर
क्षिप्रा नदी 2026 में अपने सुंदर रूप में होगी। नदी के दोनों किनारों पर लगभग 29-30 किलोमीटर लंबा पाथवे (पैदल मार्ग) और घाट विकसित हो चुके होंगे। पुराने घाटों का नवीनीकरण होगा। नदी में जल की उपलब्धता 5 नए बैराज (बांध) बढ़ाएंगे। कान्ह क्लोज डक्ट परियोजना से गंदा पानी नदी में मिलना पूरी तरह बंद हो जाएगा। यह सब अगर समय पर पूरा होता है तो 2026 खत्म होते समय क्षिप्रा का जल आचमन योग्य होगा।
स्मार्ट सिटी और डिजिटल शहरी ढांचा
2026 में उज्जैन भारत की सबसे उन्नत स्मार्ट सिटी बन चुकी होगी। शहर की 29 प्रमुख सड़कों को चौड़ा करके स्मार्ट रोड में बदला जा रहा है। इन सड़कों पर बिजली के तारों के जाल नहीं होंगे, बल्कि सब कुछ अंडरग्राउंड होगा। दावा किया जा रहा है कि साल के अंत तक यह काम पूरा हो जाएगा। पूरे शहर में 40 से अधिक डिजिटल वीएमएस (वेरिएबल मैसेज साइन) बोर्ड लगे होंगे जो मंदिर दर्शन का समय, पार्किंग की उपलब्धता दिखाएंगे।
सांस्कृतिक धरोहरों का होगा पुनरुद्धार
शहर की सुंदरता आधुनिक इमारतों के साथ विरासत में भी दिखेगी। ऐतिहासिक कोठी पैलेस वीर संग्रहालय में बदला दिखाई देगा। विक्रम कीर्ति मंदिर और ऑडिटोरियम का आधुनिकीकरण भी 2026 तक हो जाएगा। बांगड़ भवन और ओपन एयर थिएटर नए स्वरूप में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के केंद्र बनेंगे। महाराजवाड़ा भवन आलीशान हेरिटेज होटल और संग्रहालय में बदल दिया गया है। जो पुराने शहर के गौरव को फिर से स्थापित कर रहा है।
पर्यावरण फ्रेंडली और ग्रीन होगा उज्जैन
2026 का उज्जैन एक हरा-भरा शहर होगा। सड़कों के किनारे और डिवाइडरों के बीच हजारों की संख्या में सजावटी और फलदार पौधे लगाए जा चुके होंगे। शहर के भीतर आवागमन के लिए बैटरी से चलने वाली सिटी बसें और ई-रिक्शा प्रमुख साधन होंगे, जिससे प्रदूषण कम होगा। सार्वजनिक उद्यानों (जैसे नीलकंठ वन और चिंतन वन) का क्षेत्रफल बढ़ाया जाएगा। नदी किनारे बड़े स्तर पर पौधारोपण की योजना ग्रीन सिटी को सार्थक करेगी।
हरिओम राय









