Advertisement

दादागिरी पर लगेगी लगाम, सरकारी बस सेवा होगी शुरू

अप्रैल से शुरू होगी सीएम सुगम लोक परिवहन सेवा, तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा परिवहन विभाग

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

Advertisement

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। सड़कों पर अंधाधुंध गति, ठसाठस भरे यात्री अब बसों में नहीं दिखाई देंगे। ऑपरेटरों की दादागीरी पर लगाम लगाने के लिए अपने नियंत्रण में सरकार बस चलाएगी। सीएम सुगम लोक परिवहन सेवा के नाम से शुरू होने वाली सर्विस के लिए परिवहन विभाग ने अपनी तैयारी तेज कर दी है।

अगर सबकुछ ठीक रहा तो अप्रैल से सरकार नियंत्रित बसें सड़कों पर दौड़ती दिखाई देंगी। सार्वजनिक बस परिवहन सेवा का संचालन पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर किया जाएगा। सरकार द्वारा बनाई कंपनी निजी बस ऑपरेटर का चयन करेगी। यह कंपनी सार्वजनिक बस के रूट एवं समय का निर्धारण करेगी। कंपनी बस संचालन के आईटी प्लेटफार्म (इंटिग्रेटेड ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम) विकसित करेगी। यह सिस्टम बस संचालन का टाइम, किराया तय करेगा।

Advertisement

आईटी प्लेटफार्म से नियंत्रण एवं मॉनिटिरिंग: कंपनी के आईटी प्लेटफार्म पर बसों का टाइमिंग, किराया, ऑनलाइन टिकट बुकिंग, कस्टमर केयर जैसी सुविधा भी मौजूद रहेगी। इसका प्रयोग कर यात्री टिकट और बस का समय पता कर सकेंगे।

कंपनी बनाएगी इंफ्रास्ट्रक्चर

Advertisement

सरकारी बस सेवा का संचालन करने के लिए तीन कंपनियां बनाई गई हैं। प्रारंभिक तौर पर सेवा के लिए सरकार ने १०१ करोड़ रुपए की राशि आवंटित की है। राज्य स्तरीय कंपनी प्रदेश के जिलों में बससेवा के लिए पीपीपी मोड पर यात्री और ऑपरेटर सुविधा का इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करेगी। इनमें बस स्टैंड, बस डिपो, बस स्टॉप, दो शहरों को जोडऩे वाले मुख्य मार्ग पर बस स्टॉप बनाने के काम होंगे। राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी के अधीन भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, सागर, रीवा की सिटी बस कंपनी को शामिल किया गया है। ग्वालियर में कंपनी कार्यरत नहीं होने से यहां नई कंपनी का गठन किया जा रहा है।

सात क्षेत्रीय कंपनियों पर सबसे ज्यादा दारोमदार
सात क्षेत्रीय कंपनियों पर सेवा का सबसे ज्यादा दारोमदार रहेगा। यह सेवा का रूट बनाएगी और समय और शुल्क को नियंत्रित करेंगी। इनका मुख्य काम मॉनिटरिंग का रहेगा। जिला स्तरीय कंपनी क्षेत्रीय कंपनियों को सुझाव दे सकेंगी।

अभी यह है व्यवस्था

अभी प्रदेश में बस परिवहन व्यवस्था का संचालन दो तरह से हो रहा है। इंदौर, भोपाल, जबलपुर, सागर, रीवा में सिटी बसों का संचालन सरकार संरक्षित कंपनियां कर रही हैं, जबकि एक से दूसरे शहर को जाने वाली अधिकतर बसें निजी क्षेत्र से संचालित हो रही हैं।

इंदौर-भोपाल, उज्जैन के बीच चार्टर्ड बस सेवा उपलब्ध है। इसका संचालन नगरनिगम संरक्षित कंपनियों के माध्यम से होता है।

प्रदेश से बाहर जाने वाली बसें पूरी तरह निजी है।

यह बदलेगा

सरकारी बस सेवा शुरू होने से यात्री को दो फायदे होंगे। मॉनिटरिंग होने से बसें समय पर चलेंगी और इनमें यात्रियों को ठूंस-ठूंस कर नहीं भरा जा सकेगा। दूसरा किराया नियंत्रित होगा।

Related Articles

Write a review