महाकाल की महिमा… 12 दिन में पहुंचे 29.10 लाख श्रद्धालु

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री महाकालेश्वर मंदिर में साल के अंत और नववर्ष की शुरुआत में रिकॉर्डतोड़ श्रद्धालु पहुंचे। 25 दिसंबर से 5 जनवरी तक कुल 12 दिनों में देश के अलग-अलग राज्यों से 29.10 लाख श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल के दरबार में पहुंचकर दर्शन किए।
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दरअसल, 25 दिसंबर से श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या बढऩे लगी। 26 से 31 दिसंबर तक प्रतिदिन औसतन डेढ़ से दो लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। 31 दिसंबर को 1 लाख 53 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने महाकाल के दर्शन किए। नववर्ष के पहले दिन (1 जनवरी) सर्वाधिक भीड़ रही जब २४ घंटे में 6 लाख 12 हजार 879 दर्शनार्थियों ने बाबा महाकाल के दर्शन किए। इसके बाद भी श्रद्धालुओं की संख्या में कमी नहीं आई। 2 जनवरी को 2 लाख 73 हजार, 3 जनवरी को 2 लाख 19 हजार, 4 जनवरी को 2 लाख 46 हजार और 5 जनवरी को 2 लाख 14 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
चाकचौबंद रहीं व्यवस्थाएं
साल के अंतिम दिनों और नववर्ष पर आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के मंदिर और जिला प्रशासन सहित पुलिस ने चाकचौबंद व्यवस्थाएं की थीं। जगह-जगह जूता स्टैंड, पीने का पानी के साथ दर्शन मार्ग पर सीसीटीवी कैमरों से नजर रखी गई। नववर्ष के बाद प्रशासन ने अब १५ फरवरी को आने वाले महाशिवरात्रि पर्व की तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस दौरान भी देशभर से बड़ी संख्या में दर्शनार्थी बाबा के दर्शन के लिए पहुंचेंगे।
मकर संक्रांति पर बाबा महाकाल को लगाएंगे तिल से बने पकवानों का भोग
इधर, मकर संक्रांति पर्व पर श्री महाकालेश्वर मंदिर में उत्सव का उल्लास छाएगा। तड़के भस्मार्ती में सुगंधित द्रव्यों में तिल का तेल मिलाकर गर्म जल से स्नान करवाया जाएगा। इसके बाद नए वस्त्र एवं आभूषण धारण करवाकर दिव्य स्वरूप में शृंगार कर तिल्ली से बने पकवान अर्पित कर परंपरा निभाई जाएगी। इस मौके पर मंदिर की भी विशेष साज-सज्जा की जाएगी। इधर, संक्रांति पर सूर्यदेव मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के उत्तरायण होने के साथ ही दिन बड़े होने लगेंगे। इसके साथ ही श्रद्धालु मोक्षदायिनी शिप्रा में स्नान कर सूर्य को अघ्र्य देंगे। जिसके लिए इन दिनों शिप्रा में नर्मदा का पानी लिया जा रहा है। इस दिन श्रद्धालु मंदिरों में दर्शन के बाद तिल, गुड़, खिचड़ी का दान करेंगे। साथ ही गायों को चारा खिलाया जाएगा। सूर्य के उत्तरायण होते ही खरमास समाप्त होगा और मांगलिक कार्यों की शुभ शुरुआत होगी।









