रतलाम मंडल मेें दौड़ी सबसे बड़ी 87 डिब्बे की ट्रेन

लॉन्ग हॉल ट्रेन : 400 किमी का सफर मात्र 7 घंटे में तय, समय और मैनपावर की होगी बचत
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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। रतलाम रेल मंडल के इतिहास में सबसे बड़ी ८७ डिब्बे की ट्रेन गुरुवार रात को पटरियों पर दौड़ी। इसे लॉन्ग हॉल ट्रेन कहा जाता है। यह मालगाड़ी थी और प्रयोगात्मक परिचालन किया गया था, जो कि सफल रहा। अब आगे भी इस तरह की ट्रेन मंडल में चलाई जाएगी। रेलवे का दावा है कि इससे समय और मैनपावर दोनों की बचत होगी।गुरुवार रात को रतलाम रेल मंडल ने पहली बार लॉन्ग हॉल गुड्स ट्रेन का परिचालन बिलडी स्टेशन से जेएनपीटी (जवाहर लाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट) उधना के बीच किया। उधना के लिए वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेड कॉरिडोर (डब्ल्यूडीएफसी) के माध्यम से इस ट्रेन को रवाना किया गया। यह प्रयोग सफल रहा। जिससे करीब ७ घंटे का समय बचा और मैन पावर की भी खासी बचत हुई।
एक साथ 87 वैगन और 3842 टन भार
इस विशेष ट्रेन में दो गुड्स ट्रेन को एककर कुल 87 वैगन जोड़े गए थे जिनका कुल भार 3842 टन था। इस प्रयोग की बड़ी सफलता यह रही कि पूरे सफर के दौरान केवल एक ही क्रू सेट (ड्राइवर-गार्ड आदि) का उपयोग किया गया। सामान्यत: इतनी लंबी दूरी के लिए अलग-अलग चरणों में 5 क्रू सेट की जरूरत होती थी लेकिन इस सफल प्रयोग से ४ क्रू सेट की बचत हुई है।
ट्रेनों के दबाव से भी मिलेगी मुक्ति
रतलाम रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के माध्यम से इस लंबी मालगाड़ी के परिचालन का एक बड़ा फायदा यह होगा कि बड़ौदा-मुंबई रेल खंड पर ट्रेनों के दबाव (कंजेशन) में कमी आएगी। इससे यात्री ट्रेनों के समयबद्ध परिचालन में भी सुधार होगा। यह कदम भविष्य में माल परिवहन को और अधिक तेज, सुरक्षित और किफायती बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
क्या है लॉन्ग हॉल ट्रेन
लॉन्ग हॉल ट्रेन भारतीय रेलवे में लंबी दूरी की मालगाडिय़ों को कहते हैं, जिन्हें भीड़भाड़ वाले मार्गों पर यातायात सुगम बनाने और ढुलाई की लागत कम करने के लिए कई मालगाडिय़ों (रैक्स) को जोड़कर चलाया जाता है, जो सामान्य मालगाडिय़ों से काफी लंबी होती हैं (4.5 किमी तक)।
बड़ी क्षमता: ये ट्रेनें एक साथ कई बोगियों (वैगनों) को खींचती हैं, जिससे एक बार में ज्यादा माल ढुलाई होती है।
तकनीक: इसमें अक्सर 25 टन एक्सल लोड (प्रति धुरी भार) जैसी नई तकनीक का उपयोग होता है, जिससे वे भारी माल ले जा पाती हैं।
संचालन: इन्हें खासकर डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर चलाया जाता है, जिससे इनकी औसत गति बढ़ती है और समय बचता है।
लॉन्ग हॉल ट्रेन के फायदे
लगभग 400 किमी दूरी मात्र मात्र 6 घंटे 57 मिनट में तय की। सामान्य भारतीय रेलवे मार्ग की तुलना में इस परिचालन से 9 से 10 घंटे की सीधी बचत दर्ज की गई है। इतनी दूरी तय करने में ५ क्रू सेट (ड्राइवर-गार्ड आदि) की जरूरत होती है। जो सिर्फ 1 क्रू सेट में ही हो गया।









