उज्जैन बनेगा इकोनॉमिक हब, नीति आयोग ने बताया रोडमैप

आयोग की प्रमुख आर्थिक सलाहकार एना रॉय ने कहा मेडीसिटी आईटी पार्क और टूरिज्म वेलनेस सिटी से बदलेगी दिशा
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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। उज्जैन को धार्मिक नगरी के साथ स्वतंत्र विकसित आर्थिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की तैयारी शुरू हो गई है। नीति आयोग की प्रमुख आर्थिक सलाहकार एना रॉय ने ारविवार को स्पष्ट किया कि विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए उज्जैन में अर्बन प्लानिंग और आर्थिक गतिविधियों के बीच समन्वय जरूरी है।
रॉय श्री महाकालेश्वर दर्शन के बाद प्रशासनिक संकुल में जिले के अफसरों से संवाद कर रही थीं। रॉय ने कहा कि उज्जैन के विकास के लिए बुनियादी दृष्टिकोण बदलना होगा। लक्ष्य यह होना चाहिए कि बाहर से लोग यहां बसें और स्थानीय लोगों को रोजगार के लिए पलायन न करना पड़े। उन्होंने टूरिज्म, आईटी, एग्रो-प्रोसेसिंग और सर्विस सेक्टर को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
सिंहस्थ विकास कार्यों की जानकारी दी
जिला पंचायत सीईओ श्रेयांश कूमट ने बताया कि सिंहस्थ को देखते हुए 52 नई सड़कों का निर्माण और चौड़ीकरण किया जा रहा है। शिप्रा नदी के समानांतर बनने वाली एमआर-२२ सड़क सिंहस्थ बायपास को सीधे मेला क्षेत्र और घाटों से जोड़ेगी। 29 किलोमीटर लंबे नए घाटों का निर्माण और कान्ह क्लोज डक्ट परियोजना का काम जारी है। वीर भारत संग्रहालय और प्राचीन स्मारकों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है।
20 हजार करोड़ का निवेश
एमपीआईडीसी के क्षेत्रीय महाप्रबंधक राजेश राठौर ने बताया कि उज्जैन जिले में अब तक 20 हजार करोड़ रुपये का औद्योगिक निवेश आ चुका है। विक्रम उद्योगपुरी के बाद नागदा के कचनारिया में भी औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जाएगा। रॉय ने औद्योगिक इकाइयों में एआई तकनीक और अक्षय ऊर्जा के स्रोतों का उपयोग बढ़ाने पर जोर दिया। बैठक में स्मार्ट सिटी सीईओ संदीप शिवा, नीति आयोग के ईडी अभिलेश बाबेल सहित एनएचएआई, रेलवे, जल निगम और एमपीआरडीसी के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
नीति आयोग के प्रमुख सुझाव और भावी योजनाएं
टूरिज्म वेलनेस सिटी- उज्जैन में 100 एकड़ में टूरिज्म वेलनेस सिटी विकसित करने की योजना।
एग्रो प्रोसेसिंग- स्थानीय फसलों की प्रोसेसिंग के लिए यूनिट्स लगेंगी ताकि किसानों की आय बढ़े।
इवेंट कैलेंडर- उज्जैन के प्रमुख पर्वों का एक वार्षिक कैलेंडर बनाकर व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।
मेडीसिटी और आईटी पार्क- धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ शहर को आधुनिक सेवाओं का केंद्र बनाना।
मास्टर प्लान- औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास के रिहायशी इलाकों को भी मास्टर प्लान में शामिल करना।









