अब वैज्ञानिक तरीके से डिजाइन होंगे शहर के चौराहे, कलेक्टर ने तय किए मानक

उज्जैन मास्टर प्लान : आईआरसी मानकों के मुताबिक वैज्ञानिक पद्धति से चौराहों का होगा विकास
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से तेजी से विकसित हो रहे उज्जैन शहर के भविष्य की रूपरेखा यानी मास्टर प्लान को लेकर प्रशासन अब एक्शन मोड में है। खासकर शहर के ट्रैफिक को लेकर प्रशासन काफी गंभीर है। इस कारण शहर के प्रमुख चौराहों और नए बन रहे चौराहों को वैज्ञानिक पद्धति से विकसित करने की तैयारी की जा रही है।

गुरुवार शाम सिंहस्थ मेला कार्यालय के सभागृह में कलेक्टर रौशन कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में शहर की सड़कों और चौराहों के आधुनिकीकरण पर विशेष चर्चा की गई। कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि शहर में बन रहे नए मार्गों और चौराहों के निर्माण में इंडियन रोड कांग्रेस (आईआरसी) के मापदंडों और गाइडलाइन का सख्ती से पालन किया जाए। उन्होंने कहा कि सड़कों के इंटरसेक्शन (चौराहों) और क्रॉस सेक्शन का विकास केवल सौंदर्यकरण के लिए नहीं, बल्कि यातायात के दबाव और सुगमता को ध्यान में रखकर किया जाए।
ट्रैफिक मूवमेंट के अनुसार चौराहों की डिजाइन
बैठक में कलेक्टर ने तकनीकी बारीकियों पर जोर देते हुए कहा कि चौराहों की डिजाइन इस तरह तैयार की जाए जिससे ट्रैफिक का मूवमेंट व्यवस्थित रहे और जाम की स्थिति न बने। इसके लिए उन्होंने सभी निर्माण एजेंसियों को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए। बैठक में प्रभारी नगर निगम आयुक्त संतोष टैगोर, यूडीए सीईओ संदीप सोनी, लोक निर्माण विभाग के अधिकारी और मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में प्रमुख निर्णय और निर्देश
प्रगतिरत निर्माण कार्यों में सामग्री और इंजीनियरिंग की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो।
नगर निगम, उज्जैन विकास प्राधिकरण और लोक निर्माण विभाग मिलकर चौराहों का ले-आउट फाइनल करें।
आगामी सिंहस्थ और पर्यटन के बढ़ते दबाव को देखते हुए सड़कों की चौड़ाई और टर्निंग रेडियस का निर्धारण हो।










