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महाकाल में भगोरिया का उत्साह, शिव स्वर लहरियों से माहौल शिवमय

श्री महाकाल महोत्सव : सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन, रामघाट से महालोक तक निकली कला यात्रा

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। श्री महाकाल महालोक के आंगन में आयोजित पांच दिवसीय महाकाल महोत्सव के दूसरे दिन गुरुवार को संस्कृति और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग, वीर भारत न्यास और महाकाल मंदिर प्रबंध समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव ने उज्जैन के वातावरण को पूरी तरह शिवमय कर दिया है। दूसरे दिन डिंडोरी से आए अशोक कुमार मार्को और उनके दल ने गोंड गुदुमबाजा की थाप पर समां बांधा। वहीं दयाराम और उनके साथियों ने बैगा कर्मा नृत्य की प्रस्तुति दी। सागर के मनीष यादव के बरेदी नृत्य और धार के मनीष सिसौदिया के दल द्वारा प्रस्तुत भगोरिया की ऊर्जा ने महालोक में उत्साह भर दिया।

 

डमरू की गूंज के साथ निकली कला यात्रा
दोपहर में उज्जैन के मुकेश शास्त्री और उनके सहयोगियों के नेतृत्व में कला यात्रा निकाली गई। रामघाट से प्रारंभ हुई यह यात्रा हरसिद्धि पाल और बड़ा गणेश होते हुए महाकाल महालोक पहुंची। यात्रा में शामिल डमरू वादन दल की गूंज ने श्रद्धालुओं को भक्ति से सराबोर कर दिया।

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द ग्रेट इंडियन क्वायर की भावपूर्ण प्रस्तुति
शाम के सत्र में मुंबई की प्रसिद्ध टीम द ग्रेट इंडियन क्वायर ने शिवा नामक विशेष संगीतमय प्रस्तुति दी। संगीत और लाइव पेंटिंग के अद्भुत मेल से शिव तत्व को सजीव रूप में दर्शाया गया। सुरों और रंगों के इस मिलन ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया।

आज सोना महापात्रा की आवाज में गूंजेगी शिव भक्ति
वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने बताया कि महोत्सव के तीसरे दिन शुक्रवार शाम का विशेष आकर्षण सुप्रसिद्ध गायिका सोना महापात्रा (मुंबई) की प्रस्तुति होगी। शाम 7 बजे से शुरू होने वाले इस कार्यक्रम में सोना महापात्रा शिव-भक्ति, पारंपरिक लोक-संगीत और समकालीन संगीत प्रस्तुत करेगी। प्रतिदिन दोपहर निकाली जा रही कला यात्रा मेें शुक्रवार को मयूरी डोड एवं साथी (उज्जैन) द्वारा मटकी लोकनृत्य की प्रस्तुति दी जाएगी। यह यात्रा शास्त्री नगर से प्रारंभ होकर नीलगंगा चौराहा और हाट बाजार होती हुई श्री महाकाल लोक पहुुंचेगी।

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मंच पर शाम को इनकी प्रस्तुति
करमा नृत्य- उपेंद्र सिंह एवं साथी (सीधी) द्वारा गौंड जनजाति की परंपरा। परधौनी नृत्य- दयाराम एवं साथी (डिंडौरी) द्वारा बैगा जनजाति की प्रस्तुति। अहिराई नृत्य- कमलेश नामदेव एवं साथी (गोटगांव)। सैताम नृत्य- अंकिता एवं साथी (छिंदवाड़ा) द्वारा भारिया जनजाति की विरासत।

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