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चित्रकारी में लाइन का विशेष महत्व लेकिन मौलिकता भी जरूरी

अक्षरविश्व का 19वां रंग संग ड्रॉइंग कॉम्पिटिशन 18 जनवरी को, जजेस ने शेयर किए अपने अनुभव

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। अक्षरविश्व के ड्रॉइंग कॉम्पिटिशन का १९वां सीजन दो दिन बाद 18 जनवरी को कोठी रोड स्थित सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय कैम्पस में होने जा रहा है। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के सहयोग आयोजित इस कॉम्पिटिशन में शहरभर के स्कूली विद्यार्थी ‘अलौकिक सिंहस्थ 2028’ विषय पर चित्रकारी का हुनर दिखाएंगे। आयोजन को लेकर जजेस ने अपनी राय जाहिर की है। जजेस ने बताया कि चित्रकारी में लाइन का विशेष महत्व, निर्णय देते वक्त भी इसी बात का ख्याल रखा जाता है। बच्चों के मामले में उसकी मौलिकता पर फोकस होता है।

 

टास्क पूरा करने के लिए मिलेंगे 90 मिनट
कॉम्पिटिशन की शुरुआत सुबह 9.30 बजे से होगी जिसके लिए 90 मिनट का समय दिया जाएगा। इसके अंदर सभी पार्टिसिपेंट्स को दिए गए विषय पर अपना टास्क पूरा करना होगा। स्पर्धा में शामिल होने वाले प्रतिभागियों को ड्रॉइंग शीट मौके पर दी जाएगी। कलर्स एवं अन्य लगने वाली सामग्री उन्हें साथ लानी होगी। स्पर्धा के लिए चार ग्रुप ए, बी, सी, डी बनाए गए हैं। हर ग्रुप में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय के साथ ही सांत्वना पुरस्कार दिए जाएंगे।

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कॉम्पिटिशन को दी इन्होंने ताकत
कॉम्पिटिशन के सहयोगी पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, वेदा हॉस्पिटल, ओमेक्स रियलटी, मोयरा सरिया, ओपीके ग्रुप, एमआईटी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट, प्योर-श्योर दूध-घी, नियोन पांडा, नवोदय विनायक ग्रुप, आरके रियलटीज, प्रशांति ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट, नवसंवत लॉ कॉलेज, युग कार्स, सहर्ष हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, श्री महाकालेश्वर दर्शनार्थी सेवा फाउंडेशन, महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ हैं।

जजेस ने शेयर किया अनुभव

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मेरा व्यक्तिगत अनुभव है मैं पहले कलाकारों में मौलिकता देखता हूं, दूसरा उस प्रतिभागी ने विषय के साथ कैसा व्यवहार किया और अंत में रंगों के साथ कैसे काम किया, यह देखता हूं। ड्रॉइंग लंबी प्रक्रिया है, यह डिपेंट करती है कि किस एज ग्रुप का बच्चा चित्र बना रहा है। चित्रकारी में लाइन का विशेष महत्व है। बच्चे स्वयं मौलिक होते हैं। टीचर व परिजन उन पर प्रेशर डालते हैं जिससे मौलिकता खत्म हो जाती है। अक्षर विश्व की रंग संग स्पर्धा निश्चित रूप से शैक्षणिक, संस्था और बच्चों के रूप से बड़ी उपलब्धता है। सबसे बड़ी चीज निष्पक्षता होती है। इतने बच्चे होने के बाद भी इसे लगातार बरकरार रखना प्रशंसा के योग्य है।
– अक्षर आमेरिया, वरिष्ठ चित्रकार

जब भी कभी जजमेंट दिया जाता है तो सबसे पहले सब्जेक्ट देखा जाता है। चित्रकारी में लाइन का ही महत्व है। इस बार अक्षर विश्व के रंग संग ड्रॉइंग कॉम्पिटिशन का जो विषय है वह सिंहस्थ पर आधारित है। ऐसे में बच्चे शिव, साधु, शिप्रा, मंदिर के कॉम्बिनेशन पर चित्र बना सकते हैं। अक्षर विश्व का रंग संग कॉम्पिटिशन प्रतिभाओं को मंच देने का अच्छा माध्यम है। इससे बच्चों में क्रिएटिविटी आती है।
– सुनीला खंडेलवाल, वरिष्ठ चित्रकार

मेरा निर्णय इसी पर निर्भर करता है कि बच्चे ने सब्जेक्ट को कितना रिप्रजेंट किया, कलर यूज किस तरह किया, उसकी तकनीक कैसी है, फिनिशिंग कैसी है। इस बार के रंग संग ड्राइंग कॉम्पिटिशन का विषय अच्छा है। कुंभ को लेकर नई जनरेशन क्या सोचती हैं, यह इम्पॉर्टेंट है। नन्हे चित्रकारों को चाहिए वह विषय को अच्छे से रिप्रजेंट करें, कल्पनाशीलता को कागज पर उकेरें। अक्षर विश्व के कॉम्पिटिशन का यह 19वां सीजन है। ऐसी बहुत कम संस्थाएं हैं जो इतने लंबे समय तक उसी ऊंचाई पर स्पर्धा को कन्टिन्यू करें।
– डॉ. अल्पना उपाध्याय, वरिष्ठ चित्रकार

चित्रकारी में ध्यान देने योग्य बात यही है कि उसका टॉपिक और प्रतिभाग का कलर कॉम्बिनेशन। बच्चों की स्कैचिंग परफेक्ट होनी चाहिए। इस बार का विषय अलौकिक सिंहस्थ 2028 है। ऐसे में बच्चे भारतीय परंपराओं को ध्यान में रखें, पुरानी कथाओं जैसे समुद्र मंथन को भी चित्रित कर सकते हैं। अक्षर विश्व के रंग संग कॉम्पिटिशन की बात करें तो यह काफी बड़े लेवल पर होता है और इससे बच्चों को सीखने के लिए मिलता है। वहां का माहौल भी फेयर होता है।
– डॉ. अर्चना गर्गे सप्रे, वरिष्ठ चित्रकार

चित्रकारी में जो सबसे जरूरी है, वह है आइडिया और उसका प्रजेंटेशन। इसके अलावा कलर कम्पोजिशन, पार्टिसिपेंट की क्रिएटिवटी जो वह किस रूप में पहुंचा पा रहा है। सबसे जरूरी यह है कि स्पर्धा स्थल पर मोबाइल की एंट्री बैन होना चाहिए, बच्चे मोबाइल से देखकर चित्र बनाते हैंा और पैरेंट्स भी उन्हें देखकर बताते हैं, जो नहीं होना चाहिए। जो भी बच्चों के दिमाए में आए वह बनाएं, वह कैसा बना है, यह बाद की बात है। इससे उसकी असल सोच उभरकर आती है। अक्षर विश्व के आयोजन की बात करें तो बच्चे एक्साइटेड और मोटिवेटेड रहते हैं, मैं भी जब बच्चे छोटे उन्हें लेकर कॉम्पिटिशन में जाती थी।
– मानसी खत्री, वरिष्ठ चित्रकार

सबसे पहले मैं कॉन्सेप्ट को देखती हूं। इसके अलावा जो भी बच्चे ड्रॉइंग कर रहे हैं वह ऑरिजनॉलिटी का ध्यान रखें, इमेजन करें वही बनाएं, किसी की देखा-देखी ना करें। हालांकि, ऐसा बहुत कम देखने में आता है। अगर बात करें अक्षर विश्व की तो इस तरह के आयोजन की तो बड़ी जिम्मेदारी के साथ वह इसे निभा रहा है। अक्षर विश्व की जो टीम है वह सेल्फलेस काम कर रही। क्रिएटिविटी का बढ़ावा देने जैसा खूबसूरत काम अक्षर विश्व कर रहा है।
– वसु गुप्ता, वरिष्ठ चित्रकार

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