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महाकाल महालोक में जीवंत हुए अर्धनारीश्वर और वीरभद्र

श्री महाकाल महोत्सव का समापन… इंडोनेशिया और श्रीलंका के कलाकारों ने दीं मनमोहक प्रस्तुतियां

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श्रीलंका की टोली ने रचा अर्धनारीश्वर का अद्वैत संगम

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। श्री महाकाल महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या रविवार को अंतरराष्ट्रीय रंग में रंग गई। श्री महाकाल महालोक के प्रांगण में आयोजित नृत्य-नाट्य समारोह में इंडोनेशिया और श्रीलंका के कलाकारों ने भगवान शिव के दिव्य स्वरूपों को मंच पर साकार किया। कामदेव प्रसंग से लेकर वीरभद्र के रौद्र रूप तक, कलाकारों की सजीव मुद्राओं ने दर्शकों को शिव भक्ति के अनूठे संसार में पहुंचा दिया।

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कार्यक्रम की शुरुआत इंडोनेशिया से आए कलाकारों द्वारा की गई। कोकोरादा पुत्रा के निर्देशन में इस दल ने पौराणिक कथा कामदेव द्वारा शिव की तपस्या भंग करना का मंचन किया। पारंपरिक वेशभूषा और सटीक नृत्याभिनय के माध्यम से कलाकारों ने दिखाया कि कैसे कामदेव के प्रयास और शिव की गहन तपस्या के बीच आध्यात्मिक चेतना का उत्कर्ष होता है। शिव के तपस्वी और फिर रौद्र स्वरूप की इस प्रस्तुति ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।

दूसरे चरण में श्रीलंका की प्रसिद्ध सांस्कृतिक टोली ने अरियारत्न कालारत्नि के निर्देशन में अपनी कला का प्रदर्शन किया। इस प्रस्तुति में भगवान शिव के अर्धनारीश्वर और वीरभद्र स्वरूपों पर ध्यान केंद्रित किया गया। कलाकारों ने नृत्य के माध्यम से शिव-शक्ति के अद्वैत भाव और वीरभद्र के न्यायकारी स्वरूप को बेहद सशक्त ढंग से प्रस्तुत किया। श्रीलंकाई लोक परंपरा और शिव आराधना के इस संगम ने महोत्सव में अंतरराष्ट्रीय विविधता के रंग भर दिए। संचालन कवि दिनेश दिग्गज ने किया।

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कला यात्रा में दिखा गणगौर नृत्य
महोत्सव के पांचवें दिन की शुरुआत कला यात्रा से हुई। उज्जैन की पल्लवी किशन और उनके साथियों ने पारंपरिक वेशभूषा में गणगौर लोकनृत्य के साथ कलायात्रा निकाली। यात्रा गणगौर दरवाजा से शुरू होकर कार्तिक चौक और गुदरी चौराहा होते हुए श्री महाकाल लोक तक पहुंची।

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