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सिर सबसे संवेदनशील अंग, चोट को हल्के में ना लें

सिर में चोट कई कारणों से लग सकती है, इनमें दुर्घटनाएं सबसे बड़ा कारण

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डॉ रूपेश खत्री न्यूरो सर्जन। मनुष्य शरीर में सिर सबसे संवेदनशील अंग होता है। इसमें लगी चोट को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। सड़क हादसे, ऊंचाई से गिरने, भारी वस्तु से लगने से सिर में चोट की आशंका रहती है। ऐसे स्थिति में डॉक्टर की मदद तत्काल लेनी चाहिए। सिर में चोट कई कारणों से लग सकती है। इनमें सड़क दुर्घटनाएं सबसे बड़ा कारण होती है। अक्सर बाइक/कार एक्सीडेंट में सबसे ज्यादा चोट सिर में ही लगती है। कई बार मारपीट की स्थिति में भी सिर पर चोट लग जाती है।

 

यह जरूर करें- त्वरित उपचार में मरीज को सीधे और स्थिर लेटाएं। गर्दन ना हिलाएं। यदि खून बह रहा हो तो हल्का दबाव दें। बेहोश व्यक्ति को कुछ भी खाने-पीने का न दें। उल्टी होने पर करवट से लिटाएं। तुरंत नजदीकी अस्पताल/ट्रॉमा सेंटर ले जाएं। आवश्यकता पडऩे पर सीटी स्कैन करवाएं।

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सिर की चोट से रोकथाम के उपाय

बाइक चलाते समय आईएसआई मार्क हेलमेट अवश्य पहनें।

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कार में सीट बेल्ट का उपयोग करें।

बच्चों व बुजुर्गों के लिए घर में फिसलन-रोधी व्यवस्था।

खेल के दौरान सुरक्षा उपकरण पहनें।

नशे की हालत में वाहन न चलाएं।

सीढिय़ों, छत और बाथरूम में सुरक्षा रैलिंग लगाएं।

चोट के मुताबिक होते हैं लक्षण

सिर के चोट के मुताबिक लक्षण भी नजर आते हैं। हल्की चोट में सिरदर्द, चक्कर आना, उल्टी या मतली आना, थोड़ी देर के लिए बेहोशी और ध्यान या याददाश्त में कमी की समस्या होती है।

गंभीर चोट के हालात में लगातार सिरदर्द रहता है। बार-बार उल्टी आती है और बेहोशी या दौरे पड़ते हैं। आंख की पुतलियां असमान हो जाती है। नाक/कान से खून या पानी आता है। हाथ-पैर में कमजोरी या सुन्नपन रहता है और बोलने में कठिनाई होती है।

ऐसी स्थिति में यह करें- गंभीर लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल पहुंचें और त्वरित उपचार करवाएं।

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