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पढ़ाई के लिए डांटा था, पुलिस ने बालिका को माता-पिता के सुपुर्द किया

‘खाकी, के जज्बे को सलाम… माता-पिता से नाराज होकर चामला नदी में कूदने जा रही नाबालिग को बचाया

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। कानून की रक्षा करने वाली ‘खाकी, ने मंगलवार को चामला नदी में कूदने जा रही नाबालिग बालिका की जिंदगी बचाई और उसे फिर से माता-पिता के सुपुर्द कर दिया। बालिका पैरेंट्स से नाराज थी इसीलिए उसने यह जानलेवा कदम उठाया।

दरअसल, यह घटना उज्जैन जिले की बडऩगर तहसील की है। बडऩगर थाना प्रभारी अशोक कुमार पाटीदार ने बताया कि मंगलवार सुबह करीब 10.15 बजे अर्जुन पिता रमेशचंद्र मारू निवासी शासकीय चिकित्सालय, बडऩगर ने प्रधान आरक्षक राहुल सिंह राठौर को सूचना दी कि खोप दरवाजा पर चामला नदी में एक बालिका कूदकर जान देने की कोशिश कर रही है जिसे मैंने रोक रखा है। इसके बाद पुलिस टीम और डायल 112 मौके पर पहुंची और नाबालिग को रेस्क्यू करते थाने लेकर आई। यहां पूछताछ में पता चला कि बालिका ने माता-पिता द्वारा पढ़ाई को लेकर डांटने पर नाराज होकर यह कदम उठाया। इसके बाद पलिस ने उसके परिजनों को सूचना देकर थाने बुलाया और बेटी को उनके सुपुर्द कर दिया। पुत्री को सकुशल पाकर माता-पिता ने भी पुलिस को धन्यवाद दिया।

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इधर, चित्तौडग़ढ़ से गुम बालिका देवासगेट बस स्टैंड पर मिली
इधर, चित्तौडग़ढ़ (राजस्थान) से गुम बालिका को देवासगेट बस स्टैंड पर भटकते हुए देवासगेट पुलिस को मिली। इसके बाद उसे थाने लाकर पूछताछ की गई तो पता चला कि पारिवारिक विवाद के कारण नाराज होकर बिना किसी को बताए वह उज्जैन आ गई थी। बालिका ने पूछताछ में अपने साथ किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना अथवा दुर्घटना घटित होना नहीं बताया गया। बालिका से मिली जानकारी के आधार पर उसके पैरेंट्स से संपर्क कर उसके उज्जैन में होने की जानकारी दी। इसके बाद परिजन देवासगेट थाने पहुंचे। जरूरी कार्रवाई के बाद नाबालिग बालिका को उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।

होटल का नाम भूले दर्शनार्थी, पुलिस ने ढूंढा

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उज्जैन। कर्नाटक से महाकाल दर्शन करने आए श्रद्धालु दर्शन के बाद अपनी होटल का नाम भूल गए और यहां-वहां भटकने लगे। करीब तीन घंटे भटकने के बाद वह महाकाल थाने पहुंचे और पुलिस को अपनी समस्या बताई। इसके बाद एक बार फिर पुलिस ही श्रद्धालु का सहारा बनी और आधे घंटे के अंदर होटल ढूंढ निकाला। इस पर श्रद्धालु ने पुलिस को धन्यवाद दिया।

दरअसल, कर्नाटक के रायचुर के रहने वाले श्रद्धालु सुनील पिता पुरणाप्रगना मंगलवार को भगवान महाकाल के दर्शन करने के बाद अपनी होटल का नाम भूल गए। वह करीब तीन घंटे तक परेशान होकर होटल तलाशते रहे लेकिन कुछ पता नहीं चला। इसके बाद महाकाल थाने पहुंचे और समस्या बताई। इसके बाद टीआई गगन बादल के निर्देश पर एएसआई चंद्रभानसिंह चौहान और उनकी टीम ने दर्शनार्थी की होटल ढूंढने का जिम्मा उठाया और महज आधे घंटे के अंदर दर्शनार्थी को होटल पहुंचा दिया। इस सहायता के लिए उन्होंने महाकाल पुलिस को धन्यवाद दिया। एएसआई चौहान ने होटल संचालकों से भी अनुरोध किया कि वह बाहर से आकर उनकी होटल में ठहरने वाले यात्रियों को कार्ड दें जिससे वह गुम होने पर सही पते पर पहुंच सकें।

बच्चों की भी मदद ली
पुलिस ने होटल तलाशने के लिए महाकाल क्षेत्र के आसपास के बच्चों की भी मदद ली। बच्चों ने भी पूरी क्षमता से मदद की।
होटल मिलने के बाद पुलिस और दर्शनार्थी ने बच्चों को धन्यवाद दिया।

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