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24 घंटे में 4 हजार से ज्यादा शिकायतें सबसे ज्यादा नुकसान झारड़ा-माकड़ौन में

बेमौसम बारिश-ओलावृष्टि से फसलों में नुकसान

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि ने जिले के एक बड़े हिस्से में गेहूं और चने की उपज को नुकसान पहुंचाया है। पिछले 36 घंटे में करीब 4 हजार से ज्यादा खेत में नुकसान की ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा चुकी है। जिले में सबसे ज्यादा नुकसान झारड़ा और माकड़ौन में सामने आया है। महज 10 मिनट की झड़ी में चने के आकार वाले ओलों ने तबाही मचाकर रख दी।

मंगलवार को जिले के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग समय पर हुई बेमौसम बरसात से हुए नुकसान की तस्वीर अब साफ होती जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से मिले निर्देश के बाद बुधवार से ही राजस्व और कृषि विभाग का संयुक्त अमला जिले में सर्वे के लिए उतार दिया गया था। खुद अपर कलेक्टर शाश्वत शर्मा भी माकड़ौन इलाके में फसल नुकसान का जायजा लेने पहुंचे। अपर कलेक्टर ने इस इलाके के करीब 10 गांवों में जाकर फसलों को देखा। अब तक की तस्वीर से साफ हो गया है कि जिन क्षेत्रों में ओला वृष्टि की वजह से गेहूं और चने की फसल आड़ी पड़ गई है वहां उत्पादन बेहद कम रह जाएगा।

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माकड़ौन के 22 गांवों में तबाही

उज्जैन जिले में सर्वाधिक नुकसान माकड़ौन और झारड़ा इलाके में सामने आया है। माकड़ौन क्षेत्र के 22 गांव ऐसे हंै जिनमें 10 मिनट की ओलावृष्टि ने फसल को पूरी तरह चौपट कर दिया है। झारड़ा में करीब 20 गांवों में खासा नुकसान सामने आया है। इसके अलावा महिदपुर, तराना, घट्टिया, खाचरौद, उन्हेल, बडऩगर और नागदा में भी ओलावृष्टि की वजह से उपज को कुछ हद तक नुकसान होने की जानकारी सामने आई है।

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अब नुकसान नहीं, ठंड जरूर बढ़ जाएगी

जीवाजीराव वेधशाला के अधीक्षक राजेंद्र प्रकाश गुप्त के मुताबिक वेस्टर्न डिस्टरबेंस की वजह से मालवा क्षेत्र में मौसम में बदलाव आया था। यह अब आगे निकल चुका है, आगामी एक सप्ताह तक तो अब बारिश-ओलावृष्टि की संभावना नजर नहीं आती है। इतना जरूर है कि जैसे-जैसे बादल छंटेंगे, सर्दी और बढ़ जाएगी। फिलहाल न्यूनतम तापमान 12 डिग्री तक है, इसके 8 डिग्री सेल्सियस तक आने की संभावना रहेगी। पिछले चार दिन में दिन का तापमान भी 28.5 डिग्री से लगभग 4 डिग्री कम होकर 24 डिग्री पर पहुंच गया है। जिससे ठंड बढ़ गई है।

फसल बीमा के टोल फ्री नंबर पर नुकसान के 72 घंटे के भीतर किसानों को नुकसानी की जानकारी देना अनिवार्य है। यह काम सतत जारी है, नुकसानी दर्ज करने के अलावा राजस्व रिपोर्ट के आधार पर बीमा रकम का वितरण आरंभ होगा।
भगवान सिंह बगड़ावत जिला प्रबंधक इफको टोकियो

ऑनलाइन दर्ज हो रही शिकायतें

उज्जैन जिले में लगभग 4 लाख 5 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में 2 लाख 15 हजार किसानों ने गेहूं, चना व अन्य उद्यानिकी फसलें
लगाई हैं।

इनमें से 3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र सरकारी फसल बीमा योजना में कवर है। 15 जनवरी तक फसल बीमा रजिस्ट्रेशन का काम
चलता रहा।

1 लाख 46 हजार किसान ऐसे हैं जिन्होंने गेहूं-चना उपज का बीमा करवाया है। जिले में नुकसान की जानकारी दर्ज करने के लिए अधिकृत बीमा कंपनी इफको टोकियो है।

इस कंपनी ने भारत सरकार के टोल फ्री नंबर 14447 के जरिए किसानों से नुकसान के 72 घंटे के भीतर जानकारी मांगी थी।

पिछले 36 घंटे में जिले के 800 से ज्यादा किसान 4 हजार अलग-अलग सर्वे नंबर के खेत में हुए नुकसान की जानकारी ऑनलाइन दर्ज करा चुके है।

राजस्व अमले के साथ कृषि विभाग के दल नुकसान वाले क्षेत्रों में सर्वे कर रहे हैं। दल की रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो सकेगा कि जिले में किस हद तक नुकसान हुआ है।
यूएस तोमर
उप संचालक कृषि

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