एक्सप्रेस ट्रेनों में अब 12 नॉन-एसी कोच होंगे, एसी कोच की संख्या 8 तक रहेगी

जर्मन टेक्नोलॉजी के 22 कोच वाली ट्रेन में यह कॉम्बिनेशन रहेगा, कई ट्रेनों में लगे
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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। सामान्य यात्रियों को राहत देने के मकसद से रेलवे ने एक्सप्रेस ट्रेनों की कोच कॉम्बिनेशन में बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत एक्सप्रेस ट्रेनों में स्लीपर और जनरल श्रेणी के कम से कम 12 नॉन-एसी कोच अनिवार्य रूप से लगाए जाएंगे, जबकि एसी कोचों की संख्या अधिकतम 8 तक सीमित रहेगी। यह बदलाव जर्मन तकनीक पर आधारित एलएचबी (लिंक हॉफमैन बुश) कोच वाली 22 कोच की रैक में लागू होगा। करीब 80-85 प्रतिशत ट्रेनों ट्रेनों में यह कोच लग चुके हैं।
एलएचबी रैक में नया फॉर्मूला
नई व्यवस्था के तहत अधिकतम 22 कोच वाली एलएचबी रेक होगी। इसमें 12 कोच स्लीपर व जनरल श्रेणी के होंगे, जबकि 8 एसी कोच लगाए जाएंगे। दो कोच एसएलआर (मालवाहक) होंगे। रेलवे का मानना है कि इससे वेटिंग लिस्ट में कमी आएगी और जनरल व स्लीपर श्रेणी के यात्रियों को अधिक सीटें उपलब्ध हो सकेंगी।
चरणबद्ध तरीके से होगा क्रियान्वयन
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि नई कोच संरचना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। जिन रूटों पर नॉन-एसी श्रेणी में यात्रियों की मांग अधिक है, वहां प्राथमिकता के आधार पर बदलाव किया जाएगा।
अब तक 24 कोच के साथ संचालित: रेलवे अधिकारियों के अनुसार, अब तक कई एक्सप्रेस ट्रेनें 24 कोच के साथ संचालित हो रही थीं। इनमें कुछ ट्रेनों में 10 एसी कोच, 12 स्लीपर कोच और केवल 1 या 2 जनरल कोच लगाए जाते थे। परिणामस्वरूप जनरल श्रेणी के यात्रियों को भीड़ और असुविधा का सामना करना पड़ता था। त्योहारों के दौरान तो यह स्थिति और गंभीर हो जाती थी।
त्योहारों में बढ़ती है नॉन-एसी कोच की मांग
रेलवे के मुताबिक होली, छठ, दीपावली और अन्य प्रमुख पर्वों पर बड़ी संख्या में यात्री जनरल और स्लीपर श्रेणी में यात्रा करते हैं। विशेषकर उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र व दक्षिण भारत की ओर जाने वाली ट्रेनों में नॉन-एसी कोच की मांग अधिक रहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए कोच संरचना में संतुलन लाने का फैसला किया गया है।









