विक्रमोत्सव नाट्य समारोह : जटायूवधम् नाटक में जटायु के गौरवपूर्ण बलिदान का चित्रण मंच पर हो उठा जीवंत…

नाट्य समीक्षा डॉ. जफर मेहमूद उज्जैन। विक्रमोत्सव 2026 के अंतर्गत कालिदास अकादमी में रामायण का मार्मिक क्षण मंच पर जीवंत हो उठा। प्रसिद्ध नाट्य प्रस्तुति ‘जटायूवधम्’ का कुडियाट्टम शैली में प्रभावशाली मंचन हुआ। केरल के कलाकार मार्गी मधु चाक्यार ने अपनी पारंपरिक गरिमा, सशक्त भावाभिनय और सजीव मंच संयोजन से कलारसिकों को आकर्षित किया।
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कुडियाट्टम विश्व की सबसे पुरानी जीवित संस्कृत नाट्य परंपरा मानी जाती है जिसे यूनेस्को की मान्यता भी प्राप्त है। केरल में विकसित यह कला एक हजार वर्षों से अधिक पुरानी है। प्रस्तुत नाटक संस्कृत नाट्यकार शक्तिभद्र की रचना आश्चर्य चूड़ामणि के चतुर्थ अंक पर आधारित था जिसमें जटायु के गौरवपूर्ण बलिदान का अत्यंत मार्मिक चित्रण किया गया है। भाव, भंगिमा और परंपरा के अद्भुत संगम से सजा ‘जटायूवधम् नाटक कालिदास अकादमी के पं. सूर्यनारायण व्यास कला संकुल में मंचित किया गया। प्रस्तुति में कुडियाट्टम की शास्त्रीय बारीकियों और अभिनय की सूक्ष्मता ने वातावरण को आध्यात्मिक और भावनात्मक ऊंचाई प्रदान की।
निर्देशक मार्गी मधु चाक्यार, पद्मश्री मुझिक्कुलम कोच्चुकूटन चाक्यार के पुत्र और अम्मानूर माधव चाक्यार के भतीजे हैं। उन्हें रंगकर्म की समृद्ध परंपरा विरासत में मिली है। उनके मंडल ने भारत के साथ-साथ स्विट्जरलैंड, इटली, फ्रांस और दुबई के प्रतिष्ठित उत्सवों में भाग लिया है तथा येरूसलम, सिंगापुर और येल विश्वविद्यालय (यूएसए) सहित कई अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुति दी है। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय नईदिल्ली के पद्मश्री भरत गुप्ता, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के वरिष्ठ कार्यपरिषद सदस्य राजेश कुशवाह, समाजसेवी नरेश शर्मा एवं संजू मालवीय ने दीप प्रज्वलित कर किया।
जब दर्शक हो गए भावविभोर
नाटक में रामायण का अत्यंत भावुक प्रसंग प्रस्तुत किया गया। कथा के अनुसार रावण मायारूपी वेश में माता सीता का हरण कर ले जाता है। सीता के हाथ में भगवान राम द्वारा दिया गया चूड़ामणि होता है, जिसके जादुई रत्न के रावण के स्पर्श में आते ही उसका मायारूप टूट जाता है, किंतु रावण को इसका आभास नहीं होता।सीता को संकट में देख वीर पक्षी जटायु सहायता के लिए आते हैं और रावण से भीषण युद्ध करते हैं। अंतत: रावण छलपूर्वक जटायु का वध कर लंका की ओर प्रस्थान करता है। प्रस्तुति के इस चरम दृश्य ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।









